“रविवार की रात छाएगा चन्द्रग्रहण, जानें सूतक और धार्मिक महत्व”

आचार्य रजत शुक्ला
इस वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा तिथि को विशेष खगोलीय घटना घटित होने जा रही है। 7 सितम्बर 2025, दिन रविवार को संपूर्ण भारतवर्ष में चन्द्रग्रहण लगेगा। यह ग्रहण रात्रि 8 बजकर 51 मिनट पर प्रारंभ होगा और 8 सितम्बर की सुबह प्रातःकाल 2 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा।
सूतक काल
ग्रहण का सूतक 7 सितम्बर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, जप-पाठ, मंत्र-सिद्धि, तीर्थस्नान, हवन आदि शुभ कार्य करना कल्याणकारी माना गया है।
ग्रहण काल में ध्यान रखने योग्य बातें
सूतक और ग्रहण काल में अनावश्यक खाना-पीना, मैथुन, हिंसा और मल-मूत्र त्याग वर्जित है।
किसी भी प्रकार का झगड़ा या कलह करना अशुभ फल देने वाला माना गया है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में सुई काटना, पापड़ सेकना या कोई भी उत्पादन कार्य नहीं करना चाहिए। उन्हें धार्मिक ग्रंथों का पाठ-श्रवण कर प्रसन्नचित रहना चाहिए।
वृद्ध, रोगी, बालक और गर्भवती स्त्रियों को यथानुकूल भोजन या दवा लेने से कोई दोष नहीं लगता।
सूतक आरंभ से पूर्व दूब, जल या अन्य तरल पदार्थों में कुशा या तुलसी रखना श्रेयस्कर होता है।
कांसे की कटोरी या थाली में घी अलग रखकर उसमें अपना चेहरा देखकर उसका दान करने से ग्रहण दोष का शमन होता है।
ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र, विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीरामचरितमानस व हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है।
निष्कर्ष
धार्मिक दृष्टि से ग्रहण काल चिंतन, स्मरण और साधना का समय होता है। श्रद्धापूर्वक नियमों का पालन कर व्यक्ति इसे आत्मकल्याणकारी बना सकता है।




