‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान शुरू, लेकिन लापरवाही से पहले ही दिन फेल

रायपुर (शिखर दर्शन) // रायपुर जिले में 1 सितंबर से ‘नो हेलमेट-नो पेट्रोल’ अभियान की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य सड़क हादसों पर लगाम लगाना और लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करना था। लेकिन प्रशासन और पेट्रोल पंप संचालकों की लापरवाही के चलते यह अभियान पहले ही दिन फेल हो गया।
कागजों में सख्ती, जमीनी हकीकत में नर्मी
पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया था कि बिना हेलमेट पहुंचे दोपहिया चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा। इसके लिए उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को ज्ञापन देकर अभियान की जानकारी दी गई थी। प्रशासन ने भी इसे पूरा समर्थन दिया था।

लेकिन हकीकत यह रही कि सोमवार को शहर के ज्यादातर पंपों पर बिना हेलमेट पहुंचे बाइक सवारों को बिना किसी रोक-टोक के पेट्रोल भर दिया गया। न पंपकर्मी सख्ती करते दिखे और न ही प्रशासन की कोई निगरानी नजर आई।
सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में हर साल हजारों लोग दोपहिया हादसों का शिकार होते हैं। ट्रैफिक विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सड़क हादसों में होने वाली मौतों में से 35 से 40 प्रतिशत मामलों की वजह हेलमेट न पहनना है। यही वजह थी कि इस अभियान को लोगों की जिंदगी बचाने के लिए जरूरी माना गया।
लोगों का गुस्सा और तंज
अभियान की नाकामी से आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। कुछ लोगों ने कहा,
- “अगर पंपकर्मी ही सख्ती नहीं करेंगे तो फिर इस नियम का क्या फायदा? ये सिर्फ दिखावा है।”
- “प्रशासन केवल घोषणाएं करता है, लेकिन अमल करवाने में नाकाम रहता है। इसी वजह से हादसे रुकते नहीं हैं।”
- “जब अभियान की घोषणा हुई थी तो उम्मीद जगी थी कि सख्ती होगी, लेकिन पहले ही दिन फुस्स हो गया।”
अब सवाल खड़े हुए…
रायपुर में अभियान की कमजोर शुरुआत यह बड़ा सवाल खड़ा कर रही है कि क्या प्रशासन और पंप संचालक सच में लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं, या फिर यह महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी। अगर अभियान को इसी तरह ढीले-ढाले तरीके से चलाया गया तो इसका असर बिल्कुल नहीं दिखेगा और सड़क हादसों में कमी लाने का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।



