‘भारत-पाक संघर्ष में कोई मध्यस्थता स्वीकार नहीं’, एस. जयशंकर का ट्रंप पर बिना नाम लिए सीधा वार

नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि भारत किसी भी तरह की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि यह रुख केवल सरकार का नहीं, बल्कि पिछले पचास वर्षों से राष्ट्रीय सहमति का हिस्सा है।
जयशंकर ने कहा कि चाहे किसानों के हित हों, व्यापारिक नीतियां हों या रणनीतिक स्वायत्तता, भारत का दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने अमेरिका पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “अगर आपको भारत से तेल खरीदने में समस्या है, तो न खरीदें। किसी को मजबूर नहीं किया जा रहा।”
किसानों और रणनीतिक स्वायत्तता पर स्पष्ट रुख
विदेश मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने विपक्षी स्वर उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई असहमत है तो भारत की जनता को यह बताना चाहिए कि वे किसानों के हितों या देश की स्वतंत्र नीति को महत्व नहीं देते।
ट्रंप की विदेश नीति पर टिप्पणी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ज़िक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि “हमने कभी ऐसा राष्ट्रपति नहीं देखा जिसने विदेश नीति को ट्रंप की तरह सार्वजनिक रूप से संचालित किया हो।” उन्होंने कहा कि ट्रंप ने केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि गैर-व्यापारिक मुद्दों पर भी टैरिफ लगाए, जो परंपरागत अमेरिकी नीति से बहुत अलग था।
आत्मनिर्भरता और विविधता पर जोर
जयशंकर ने कहा कि हाल के अनुभवों ने भारत को सिखाया है कि किसी एक आपूर्ति श्रृंखला या एक ही बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब ज़रूरी है कि हम विविधता लाएं, हेजिंग करें और सबसे महत्वपूर्ण – घर पर अधिक काम करें। यही आत्मनिर्भर भारत का संदेश है।”
ट्रंप के युद्धविराम दावे को दोहराया इनकार
बता दें कि ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया था। हालांकि, भारत ने हर मंच पर इसे सिरे से खारिज किया है और साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के मुद्दे पर किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी।



