कुत्तों के आतंक से त्रस्त मध्यप्रदेश : NHM रिपोर्ट में खुलासा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सियासत तेज

MP में कुत्तों पर सियासत: BJP-कांग्रेस में जुबानी जंग , रहवासी बोले- इंसानों का है शहर पर पहला हक , भोपाल से उज्जैन तक 2 लाख से ज्यादा लोग हुए डॉग बाइट के शिकार

भोपाल ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट, चीता स्टेट और भेड़िया स्टेट जैसे नामों से पहचान मिली है, लेकिन अब हालात ऐसे बन गए हैं कि इसे “कुत्ता पीड़ित प्रदेश” कहना गलत नहीं होगा। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) की रिपोर्ट ने राज्य में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक की पोल खोल दी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए आदेश ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है, जिस पर अब राजनीति भी तेज हो गई है।
रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत किए गए सर्वे में सामने आया कि मध्यप्रदेश में कुत्तों का कहर किसी जहर से कम नहीं है। रतलाम सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जबकि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत बड़े शहरों में हजारों लोग शिकार बने।
- इंदौर: 54,508
- भोपाल: 19,285
- ग्वालियर: 25,065
- जबलपुर: 18,176
- उज्जैन: 19,949

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल राज्यभर में कुत्तों के हमले के मामलों का आंकड़ा 2 लाख के पार पहुंच चुका है। केवल भोपाल में ही आवारा कुत्तों की संख्या दो लाख से ज्यादा बताई जा रही है। नसबंदी कार्यक्रमों में धांधली के आरोप लगातार लगते रहे हैं, जिससे समस्या और विकराल हो गई है।
कांग्रेस-बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप
कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना ने आरोप लगाया कि बीते 20 वर्षों से सत्ता में रही बीजेपी सरकार ने कुत्तों की समस्या को अवसर बनाकर धांधली की। उन्होंने कहा कि मासूमों की जान तक जा चुकी है, अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ईमानदारी से पालन होना चाहिए।
वहीं, बीजेपी प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि यह मामला राजनीति का नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी शासित राज्यों में इस विषय पर गंभीरता से काम हो रहा है।

जनता की राय
- निधि वर्मा (भोपाल): “शहर पर पहला हक इंसानों का है। जिन्हें कुत्ते पालने हैं, वे अपनी सोसाइटी बनाएं।”
- कमल राठी: “आवारा कुत्तों से नुकसान होने पर नगर निगम व प्रशासन को 50 गुना मुआवजा देना चाहिए।”
- देवेंद्र गुप्ता: “स्ट्रीट डॉग को सार्वजनिक स्थानों पर खिलाना बंद होना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है।”
- अंकिता मालवीय: “बेजुबानों के लिए योजनाबद्ध व्यवस्था जरूरी है, केवल मारना समाधान नहीं।”
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में कुत्तों की समस्या अब केवल जनस्वास्थ्य का मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।



