अमेरिका के पूर्व NSA जॉन बोल्टन के घर FBI की रेड, भारत पर लगे टैरिफ को लेकर की थी ट्रंप की आलोचना

अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और अब उनके कट्टर आलोचक जॉन बोल्टन के घर एफबीआई ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई कथित तौर पर उनकी किताब और गोपनीय दस्तावेजों से जुड़े मामले के सिलसिले में हुई। हालांकि, अभी तक बोल्टन को न तो हिरासत में लिया गया है और न ही उन पर कोई औपचारिक आरोप दर्ज हुआ है।
किताब से शुरू हुआ विवाद
बोल्टन ने साल 2020 में एक किताब लिखी थी, जिसमें ट्रंप प्रशासन से जुड़ी कई गोपनीय जानकारियां उजागर की गई थीं। ट्रंप ने इसकी रिलीज़ रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन किताब प्रकाशित हो गई। इसके बाद से ही दोनों के रिश्ते और खराब हो गए और बोल्टन लगातार ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं।
भारत को लेकर ट्रंप पर हमला
हाल ही में एक इंटरव्यू में बोल्टन ने ट्रंप को “सनकी राष्ट्रपति” करार देते हुए कहा कि उनकी टैरिफ पॉलिसी अमेरिका-भारत संबंधों को नुकसान पहुंचा रही है। बोल्टन ने चिंता जताई कि भारत पर लगातार टैरिफ थोपने से यह संदेश जाता है कि अमेरिका अब भारत के साथ नहीं खड़ा है, जिससे भारत रूस और चीन के और करीब जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछली अमेरिकी सरकारें एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए भारत के साथ मजबूत साझेदारी बनाने पर काम करती रहीं, लेकिन ट्रंप का रवैया इसके उलट है।
ट्रंप का भारत पर 50% टैरिफ
ट्रंप ने पहले भारत पर 25% टैरिफ लगाया था और बाद में रूस से तेल खरीद जारी रखने के चलते अतिरिक्त 25% टैरिफ भी थोप दिया। यानी भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा दिया गया। अमेरिका का आरोप है कि भारत का तेल व्यापार रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद पहुंचा रहा है।
एफबीआई निदेशक का संकेत
छापे के तुरंत बाद एफबीआई निदेशक काश पटेल ने सोशल मीडिया पर लिखा – “कानून से ऊपर कोई नहीं, एफबीआई एजेंट मिशन पर हैं।” इसे लेकर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।
पृष्ठभूमि
बोल्टन पहले भी ट्रंप के भारत-पाकिस्तान को लेकर दिए गए दावे का मजाक उड़ा चुके हैं। ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराया था, जिस पर बोल्टन ने कहा कि यह सिर्फ ट्रंप की आदत है कि वह हर चीज़ का श्रेय लेना चाहते हैं।
👉 यह पूरा मामला अब केवल गोपनीय दस्तावेजों का नहीं, बल्कि भारत को लेकर ट्रंप की नीतियों और बोल्टन की कड़ी आलोचना से भी जुड़ गया है। इससे अमेरिका की घरेलू राजनीति के साथ-साथ उसके भारत संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।



