ऑपरेशन साइबर शील्ड: रायपुर रेंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट ठगी में शामिल कंबोडिया गैंग के 5 सदस्य गिरफ्तार
रायपुर ( शिखर दर्शन ) // साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ के तहत रायपुर रेंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। रायपुर रेंज साइबर थाना की टीम ने कुख्यात कंबोडिया गैंग के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो डिजिटल अरेस्ट के जरिए करोड़ों की ठगी में शामिल थे। आरोपी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में छिपे हुए थे, जहां से पुलिस ने दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक (रायपुर रेंज) अमरेश मिश्रा के निर्देशन में की गई।
दो मामलों में करोड़ों की ठगी
- पहला मामला: पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र के रामेश्वर प्रसाद देवांगन से आरोपियों ने खुद को सीबीआई और आरबीआई का अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” कर ₹14 लाख की ठगी की गई। इस पर धारा 318(4), 3(5) बीएनएस और 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज हुआ।
- दूसरा मामला: इसी थाना क्षेत्र में संतोष दाबडघाव को अज्ञात कॉलर्स ने दूरसंचार विभाग और मुंबई पुलिस का अधिकारी बनकर धमकाया। आरोपियों ने उन्हें 24 घंटे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर जोड़े रखा और “डिजिटल अरेस्ट” कर ₹88 लाख की धोखाधड़ी की।
ऐसे पकड़े गए आरोपी
आईजी अमरेश मिश्रा ने मामलों की गंभीरता को देखते हुए रायपुर साइबर थाना को तकनीकी साक्ष्य जुटाकर आरोपियों की पहचान करने के निर्देश दिए। जांच में मुख्य आरोपी चिह्नित होने के बाद पुलिस टीमों को दिल्ली, यूपी, एमपी और महाराष्ट्र भेजा गया।
- मनीष पाराशर (27) – गोकुलपुरी, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली
- अर्जुन सिंह (25) – हाथरस, उत्तर प्रदेश
- राहुल मर्कड (40) – अहमदनगर, महाराष्ट्र
- आकाश तुषरानी (33) – उल्हासनगर, ठाणे (महाराष्ट्र)
- लखन जाटव (36) – उज्जैन, मध्य प्रदेश
गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का मानना है कि यह गैंग डिजिटल अरेस्ट के नए तरीकों से लोगों को फंसा कर करोड़ों की ठगी कर चुका है।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय – पुलिस की अपील
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि—
- कोई भी व्यक्ति अगर खुद को सीबीआई, आरबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर कॉल करता है तो तुरंत नंबर ब्लॉक करें।
- व्हाट्सएप वीडियो कॉल या लिंक पर भरोसा न करें, खासकर जब आपसे पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल मांगी जाए।
- किसी भी कॉल पर डिजिटल अरेस्ट (24 घंटे कैमरे पर नजर रखने) जैसी शर्तें मानना अपराधियों की चाल है।
- संदेहास्पद स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी थाने में सूचना दें।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में डरने की बजाय सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।



