“छत्तीसगढ़ में हल षष्ठी पर्व की धूम: बिलासपुर के सिरगिट्टी कंचन विहार शिव मंदिर में महिलाओं ने संतान सुख की कामना के साथ किया व्रत और पूजा”

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर शहर के सिरगिट्टी क्षेत्र स्थित कंचन विहार के शिव मंदिर में हल षष्ठी पर्व का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर कालोनी की सैकड़ों महिलाओं ने संतान सुख की प्राप्ति के लिए व्रत रखा और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। हल षष्ठी, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कमरछठ’ भी कहा जाता है, विशेष रूप से संतान सुख की कामना के लिए मनाया जाता है।

पारंपरिक पूजा विधि:
हल षष्ठी के दिन महिलाएं प्रात: समय में गौरी-गणेश और कुश की पूजा करती हैं। इसके बाद, वे पूजा की थाली लेकर एकत्रित होती हैं और ‘हरछठ महारानी’ और ‘ग्वालिन’ की कथा का श्रवण करती हैं। इस दिन अन्न का त्याग कर विशेष व्रत रखा जाता है। मान्यता है की इस दिन व्रत रखने वाली महिलाये ऐसा आहार ग्रहण नहीं करती है जो की कृषि उपकरण हल इत्यादि के संपर्क से उत्पन्न हुआ हो , साथ ही यह भी जरूरी है की व्रत रखने वाली महिलाये आज के दिन ऐसी भूमि मे कदम नहीं रखती जिसमे हल चलाया गया हो अथवा वह कृषि भूमि के रूप मे मौजूद हो । कथा के माध्यम से महिलाएं संतान सुख की प्राप्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं।
पौराणिक कथा:
हल षष्ठी की पूजा से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा है जिसमें एक ग्वालिन ने अपने पुत्र की रक्षा के लिए सत्य बोलने का संकल्प लिया। कथा के अनुसार, ग्वालिन ने अपने पुत्र के जीवन की रक्षा के लिए झूठ बोलने से बचने का प्रण लिया, जिससे उसकी संतान की उम्र लंबी हुई। यह कथा महिलाओं को सत्य बोलने और संतान सुख की प्राप्ति के लिए प्रेरित करती है।
आध्यात्मिक उद्देश्य और मान्यता:
हल षष्ठी का आध्यात्मिक उद्देश्य संतान सुख की प्राप्ति और परिवार में सुख-शांति बनाए रखना है। महिलाएं इस दिन विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना करती हैं। यह पर्व परिवारिक एकता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने का भी प्रतीक है।

इतिहास:
हल षष्ठी पर्व का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। यह पर्व विशेष रूप से छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। समय के साथ इस पर्व की महत्ता और लोकप्रियता बढ़ी है, और यह आज भी महिलाओं के बीच विशेष स्थान रखता है।
बिलासपुर में आयोजन:
बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र स्थित कंचन विहार के नरबदेश्वर महादेव शिव मंदिर में आयोजित हल षष्ठी पूजा में कालोनी की सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने संतान सुख की प्राप्ति के लिए व्रत रखा और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। इस आयोजन ने स्थानीय समुदाय में धार्मिक और सामाजिक एकता का संदेश दिया।

हल षष्ठी पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं की शक्ति और संतान सुख की कामना का भी प्रतीक है। इस पर्व के माध्यम से समाज में पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।



