जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से धराली जैसी तबाही, चशोटी में मचैल माता यात्रा के श्रद्धालु बह गए, 10 से अधिक की मौत की आशंका, राहत कार्य जारी

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // देशभर में जारी बारिश और बाढ़ ने लोगों के लिए संकट और बढ़ा दिया है। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पड्डर सब-डिवीजन के चशोटी गांव में बुधवार को बादल फटने (Kishtwar Cloudburst) से बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए। इस आपदा में 10 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है जबकि 25 से अधिक लोग घायल हैं। अभी तक प्रशासन ने किसी मौत की पुष्टि नहीं की है।
घटना के समय चशोटी में मचैल माता मंदिर यात्रा का लंगर चल रहा था। तेज बारिश और मलबे की चपेट में कई श्रद्धालु बह गए। स्थानीय लोग राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सभी बचाव दल मौके पर पहुंच चुके हैं और जो भी आवश्यक सहायता होगी, उपलब्ध कराई जाएगी। मौसम खराब होने की वजह से हेलीकॉप्टर सेवाएँ फिलहाल नहीं चल पा रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय डीसी से संपर्क कर जानकारी ली और बताया कि इलाके में हालात बेहद कठिन हैं। रास्ते टूटने और लगातार बारिश के कारण वहां पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
हर साल अगस्त में मचैल माता तीर्थयात्रा होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। इस यात्रा में पद्दर से चशोटी तक 19.5 किलोमीटर और चशोटी से मचैल तक 8.5 किलोमीटर की यात्रा पैदल की जाती है।
उत्तराखंड में भी भारी तबाही
उत्तराखंड के धराली गांव में भी मौसम ने तबाही मचाई। पांच अगस्त को दिन में दोपहर 1:30 बजे अचानक आई जलप्रलय और बाद में लगातार छह प्रहारों से गांव और आसपास के इलाके आपदा के आगोश में आ गए। खीर गंगा में उफान आने से पुल और मोबाइल टावर ध्वस्त हो गए। बिजली और संपर्क पूरी तरह से टूट गया।

बचावकर्मी मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए खोजी कुत्तों और सीमित संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन समय और कठिन परिस्थिति के कारण जीवित बचे लोगों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है।
देश के ज्यादातर हिस्सों में लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने संकट और बढ़ा दिया है। शिमला के बाद किश्तवाड़ और उत्तराखंड में भारी नुकसान से यह साफ हो गया है कि मानसून के इस दौर में बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है।




