रायपुर संभाग

विधानसभा में अवैध रेत खनन पर गरमाया सियासी पारा: विपक्ष ने पुलिस-माइनिंग अधिकारियों की मिलीभगत का लगाया आरोप, चर्चा की मांग पर आसंदी ने जताई असहमति

रायपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को शून्य काल के दौरान अवैध रेत खनन का मुद्दा जोरशोर से गूंजा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेशभर में बढ़ते अवैध रेत उत्खनन को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए आरोप लगाया कि यह सब पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। उन्होंने कहा कि खदानों में गोलियां चल रही हैं और जीवित लोगों पर ट्रक चढ़ाए जा रहे हैं, यह स्थिति बेहद खतरनाक है, इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।

पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि माइनिंग अफसरों को जब पूछताछ की जाती है तो वे ऊपर से आदेश होने की बात कहकर कार्रवाई से बचते हैं। उन्होंने रायगढ़ जिले की मांड नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अवैध उत्खनन अपने चरम पर है और हर किनारे को खोद डाला गया है।

वहीं, विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि पत्रकारों तक को धमकाया जा रहा है, पूरी मिलीभगत के साथ यह अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। दिलीप लहरिया ने बताया कि महानदी क्षेत्र में बारिश के मौसम में भी रेत की सप्लाई रुक नहीं रही है, रेत माफिया खुलेआम चाकूबाजी कर रहे हैं। रामकुमार यादव ने भी समर्थन करते हुए कहा कि यह गंभीर विषय है और इस पर सदन में चर्चा आवश्यक है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश के निर्माण कार्यों और पर्यावरण से जुड़ा बड़ा विषय है। माफिया सरकार को जेब में रखकर नदियों को बर्बाद कर रहे हैं। कई जिलों में खुलेआम गोलियां चल रही हैं।”

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने इस मुद्दे पर स्थगन सूचना को अस्वीकार करते हुए इसे ग्राह्य नहीं माना। इसके विरोध में विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

यह मुद्दा न केवल संसदीय मर्यादाओं से जुड़ा था, बल्कि प्रदेश के जनजीवन, पर्यावरण और कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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