अन्तर्राष्ट्रीय

तेल अवीव पर ईरान का बैलिस्टिक हमला, अराक न्यूक्लियर रिएक्टर पर इजराइल की जवाबी कार्रवाई; अमेरिका ने सैन्य हस्तक्षेप के संकेत दिए

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // ईरान-इजराइल युद्ध आज 19 जून को सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है, और दोनों देशों के बीच तनाव अब पूर्ण युद्ध का रूप ले चुका है। ईरान ने बुधवार सुबह इजरायल की राजधानी तेल अवीव पर 25 बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया, जिससे शहर के कई हिस्सों में भारी तबाही मच गई। रिपोर्ट के अनुसार, तेल अवीव का स्टॉक एक्सचेंज और एक प्रमुख अस्पताल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, और कई इमारतें जमींदोज हो गईं। हमले में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की आशंका है।

इजरायल ने इस हमले का जवाब ईरान के परमाणु कार्यक्रम के केंद्र अराक शहर में दिया, जहां स्थित IR-40 हैवी वॉटर न्यूक्लियर रिएक्टर को निशाना बनाया गया। यह रिएक्टर ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है। इजराइली सेना ने हमले से पहले अराक और खोंडब शहरों के नागरिकों को चेतावनी दी थी कि वे अपने इलाके खाली कर दें।

इस दौरान ईरान ने दक्षिण इजराइल के बीरशेबा स्थित सोरोका अस्पताल पर भी मिसाइल हमला किया। राजधानी सहित अन्य शहरों में हमलों के बाद सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेल्टर की ओर भागने लगे।

ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज के अनुसार, ईरान ने तेल अवीव, बीरशेबा, रमत गन और होलोन पर भी मिसाइलें दागीं, जिससे कम से कम 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इससे पहले ड्रोन हमलों की भी पुष्टि की गई है।

अमेरिका की एंट्री, ट्रंप ने दी कार्रवाई की मंजूरी

इस युद्ध में अब अमेरिका की भी एंट्री हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की अनुमति दे दी है, हालांकि अंतिम आदेश अभी रोका गया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका यह देखना चाहता है कि क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने को तैयार है या नहीं। इस बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में सैन्य तैनाती बढ़ा दी है।

अब तक की मानवीय क्षति

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस युद्ध में ईरान में अब तक 450 से अधिक और इजरायल में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। दोनों देशों में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। ईरान ने इंटरनेट बंद कर दिया है, जिससे बाहरी संचार में बाधा आई है।

अमेरिका में ईरान समर्थकों का प्रदर्शन

युद्ध के बीच अमेरिका के न्यूयॉर्क में ईरान समर्थकों ने रैली निकाली, जिसमें “ईरान से दूर रहो” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों को इजराइली दूतावास की ओर बढ़ने से NYPD ने रोक दिया। इस प्रदर्शन का आयोजन फिलिस्तीनी युवा आंदोलन और पीपुल्स फोरम जैसे वामपंथी संगठनों ने किया था।

यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक राजनीति को प्रभावित करने की दिशा में बढ़ रहा है। अमेरिका की सक्रिय भागीदारी और ईरान-इजराइल के आक्रामक रुख से मध्य पूर्व में बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है। युद्ध की यह आग कहीं वैश्विक संकट में न बदल जाए, यही चिंता अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ती जा रही है।

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