प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा यात्रा: जी-7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की आवाज बनेंगे, भारत-कनाडा संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद
नई दिल्ली/कनानास्किस (शिखर दर्शन) // प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन 2025 में भाग लेने के लिए कनाडा पहुंच चुके हैं। यह सम्मेलन कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कनानास्किस में 16-17 जून को आयोजित हो रहा है, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और इटली के राष्ट्र प्रमुख भी हिस्सा ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी लगातार छठी बार इस वैश्विक मंच का हिस्सा बने हैं।
प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के विशेष आमंत्रण पर इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत-कनाडा संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रिश्तों में नई शुरुआत की संभावनाएं लेकर आई है।
पीएम मोदी ने कनाडा पहुंचने के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कैलगरी, कनाडा पहुंचा। सम्मेलन में विभिन्न नेताओं से मुलाकात करूंगा और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा करूंगा। वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं पर भी जोर दूंगा।”

भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त चिन्मय नाइक के अनुसार, पीएम मोदी इस सम्मेलन के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैश्विक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। साथ ही वे सम्मेलन से इतर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे, जिसमें दोनों देशों के बीच हालिया तनाव को पीछे छोड़कर सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर चर्चा होगी।
इस बीच, सम्मेलन की सुरक्षा व्यवस्था में भी हलचल मच गई जब सोमवार को एक निजी विमान नो-फ्लाई ज़ोन में प्रवेश कर गया। लड़ाकू विमानों ने तत्काल उस विमान को नीचे उतरवाया और अब पायलट से पूछताछ की जा रही है। हालांकि इस घटना में कोई क्षति नहीं हुई है, लेकिन यह सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर गई है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि भारत वैश्विक मंचों पर दक्षिणी देशों की आवाज बनने को प्रतिबद्ध है। साथ ही, इस यात्रा से भारत और कनाडा के रिश्तों में नई उम्मीद की किरण दिख रही है।



