बिलासपुर संभाग

“ गौसेवा संकट में “ ___ 23 वर्षों से बीमार गायों की सेवा कर रही संस्था ने प्रशासन से लगाई गुहार , स्थायी गौ अस्पताल और संसाधनों की उठाई मांग

बिलासपुर (शिखर दर्शन) //
श्री गोपाल कामधेनु गौ सेवा धाम, जो पिछले 23 वर्षों से घायल, बीमार और असहाय गौमाताओं की निस्वार्थ सेवा कर रहा है, अब स्वयं गंभीर संकट की स्थिति से जूझ रहा है। संस्था ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो गौसेवा का यह पुनीत कार्य बाधित हो सकता है।

संस्था की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में पांच प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल सहयोग की अपील की गई है:

1. स्थायी गौ अस्पताल हेतु भूमि की मांग:
संस्था ने बताया कि बीते दो दशकों से अधिक समय से वह किराए के भवन में घायल गायों का इलाज कर रही है। बिना किसी सरकारी सहायता के संचालित यह सेवा अब स्थायी आधारभूत संरचना के अभाव में ठहरने की कगार पर है। संस्था ने पांच एकड़ भूमि की मांग की है, ताकि एक पूर्णकालिक गौ अस्पताल की स्थापना हो सके।

2. अवैध पशु कटाई पर रोक और सख्त कार्यवाही:
राजकिशोर नगर, मंगला बाजार सहित शहर के कई क्षेत्रों में आज भी अवैध रूप से पशु वध बदस्तूर जारी है। संस्था ने आरोप लगाया कि शिकायतों और छापों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रशासन से कठोर कदम उठाने और दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्यवाही की मांग की है।

3. पशु चिकित्सक की नियुक्ति व नियमित सेवाएं:
संस्था ने बताया कि जिला पशु अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति न होने के कारण घायल गौमाताओं को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल में तत्काल स्थायी डॉक्टर की नियुक्ति की जाए।

4. घायल गायों के लिए भोजन की व्यवस्था:
संस्था वर्तमान में 53 गंभीर रूप से घायल गौमाताओं की सेवा कर रही है। इनके इलाज के साथ-साथ भोजन की जिम्मेदारी भी संस्था ही उठा रही है। उन्होंने प्रशासन से चारा, भूसा और चपाती जैसी सामग्री की नियमित आपूर्ति की मांग की है।

5. घायल गायों के लिए वाहन की आवश्यकता:
संस्था के पास कोई परिवहन साधन नहीं है जिससे घायल गायों को घटनास्थल से उपचार केंद्र लाया जा सके। ऑटो या निजी संसाधनों के भरोसे यह कार्य कठिन होता जा रहा है। संस्था ने एक समर्पित वाहन की मांग की है।

संस्था के अध्यक्ष ने प्रशासन से शीघ्र स्थल निरीक्षण कर निर्णय लेने का आग्रह करते हुए कहा कि “यदि प्रशासन से सहयोग नहीं मिला तो यह सेवा कार्य रुक सकता है। इतने वर्षों से हम बिना सरकारी सहायता के काम कर रहे हैं, लेकिन अब संसाधनों का संकट गहराता जा रहा है।”

यह मामला न केवल गौसेवा से जुड़ा है, बल्कि शहर में पशु संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा भी है। यदि समय रहते प्रशासन ने सकारात्मक पहल नहीं की, तो यह सेवा केंद्र जो वर्षों से निःस्वार्थ रूप से कार्यरत है, संकट में पड़ सकता है — जिसका दुष्प्रभाव दर्जनों घायल और असहाय गौमाताओं पर पड़ना तय है।

________________________________________________________________________

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Don`t copy text!