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‘अगर कानून कोर्ट बनाएगी तो संसद क्यों ?’ : अठावले ने भी सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर उठाए सवाल

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के मुख्य न्यायाधीश पर बयान से मचा बवाल, पार्टी ने बनाई दूरी, विपक्ष ने की बर्खास्तगी की मांग

नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने हाल ही में न्यायपालिका और संसद की भूमिका को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि न्यायपालिका का सम्मान सभी के लिए जरूरी है, लेकिन संसद देश का सर्वोच्च विधायी निकाय है। उन्होंने कहा कि कानून बनाना संसद का कार्य है, जबकि न्यायपालिका का दायित्व संविधान और कानून के अनुसार निर्णय देना है।

उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट की हर टिप्पणी जरूरी नहीं कि हर बार उपयुक्त हो। हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को भी संसद का सम्मान करना चाहिए।”

अठावले का यह बयान उस समय सामने आया है जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति के लिए सीधे मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को जिम्मेदार ठहरा दिया। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, “अगर कानून सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगी, तो संसद भवन को बंद कर देना चाहिए।”

बीजेपी ने बयान से बनाई दूरी, कहा- ‘निजी राय है दुबे की’

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बयान से किनारा करते हुए कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है, बल्कि दुबे की निजी राय है। उन्होंने कहा, “हम न्यायपालिका का हमेशा सम्मान करते आए हैं और करते रहेंगे।”

विपक्ष हमलावर, की गई बर्खास्तगी की मांग

दुबे के बयान के बाद विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने निशिकांत दुबे को लोकसभा से तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि दुबे मंत्री बनने की लालसा में हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ाने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से दुबे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

गौरतलब है कि निशिकांत दुबे झारखंड की गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद हैं और यह उनका लगातार चौथा कार्यकाल है।


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