पुलिस कस्टडी में युवक पर बेरहमी से पिटाई का आरोप: हाथ, पीठ और चेहरे पर गंभीर चोटें, समाजसेवी ने जांच की उठाई मांग
सारांश:
जबलपुर में शहपुरा थाना पुलिस पर एक युवक, सुदर्शन, के साथ कस्टडी में मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। युवक के शरीर पर चोट के निशान पाए गए, जिनका कहना है कि पुलिस ने अवैध शराब बिक्री के आरोप में उसे पकड़कर पूछताछ के दौरान पीटा। जेल से रिहा होने के बाद सुदर्शन ने समाजसेवी से संपर्क कर मामले की जांच की मांग की। हालांकि, अपर पुलिस अधीक्षक ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और जांच कराने का आश्वासन दिया। सुदर्शन पर पहले भी अवैध शराब बिक्री के मामले दर्ज हैं, और रैली में महिलाओं से छेड़छाड़ के बाद उसकी पिटाई की बात भी सामने आई है। जांच के बाद ही मामला स्पष्ट होगा।
जबलपुर (शिखर दर्शन) //
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में पुलिस हिरासत में एक युवक के साथ बेरहमी से मारपीट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि शहपुरा थाना पुलिस ने अवैध शराब बेचने के संदेह में सुदर्शन नामक युवक को पकड़कर थाने में पीटा। युवक के शरीर पर चोट के कई निशान मौजूद हैं, जिनमें पीठ, हाथ और चेहरे पर चोट के साफ सबूत देखे जा सकते हैं।
यह मामला 9 अप्रैल का बताया जा रहा है, जब चरगवां थाना क्षेत्र के कुलोन गांव निवासी सुदर्शन के घर पर शहपुरा पुलिस ने अवैध शराब बिक्री की सूचना पर दबिश दी थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे धारा 151 के तहत 12 अप्रैल को जेल भेज दिया था।
हालांकि, जेल प्रशासन का कहना है कि सुदर्शन जेल में अजीब व्यवहार कर रहा था, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद सुदर्शन ने शहपुरा के एक समाजसेवी से संपर्क कर पुलिस पर कस्टडी में मारपीट का आरोप लगाया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
वहीं, इस पूरे मामले पर जबलपुर के अपर पुलिस अधीक्षक आनंद कलादगी ने कहा कि पुलिस पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। यदि युवक को कोई शिकायत है तो वह लिखित आवेदन देकर जांच की मांग कर सकता है, पुलिस जांच कराने को तैयार है।
जानकारी के अनुसार, सुदर्शन पर पहले भी अवैध शराब बिक्री से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। इतना ही नहीं, शराबबंदी को लेकर निकाली गई एक रैली के दौरान महिलाओं से छेड़छाड़ करने और उसके बाद ग्रामीणों द्वारा की गई पिटाई का आरोप भी सामने आया है।
अब मामला जांच के दायरे में है और आगे की कार्यवाही में यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक के साथ वास्तव में पुलिस ने अत्याचार किया है या फिर मामला कुछ और है।



