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जम्मू-कश्मीर: वक्फ कानून को लेकर विधानसभा में हंगामा, विधायकों के बीच हुई जोरदार हाथापाई

श्रीनगर (शिखर दर्शन) // जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वक्फ कानून को लेकर लगातार दूसरे दिन भी जोरदार हंगामा हुआ। मंगलवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी विधायकों—खासकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) और कांग्रेस—ने इस कानून को मुस्लिम विरोधी बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। माहौल तब और गरमा गया जब PDP विधायक वहीद-उर-रहमान पारा वेल में आ गए और बिल के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की मांग करने लगे।

स्पीकर के पोडियम की ओर बढ़ते देख स्पीकर एडवोकेट अब्दुल रहीम राथर ने मार्शलों को उन्हें बाहर निकालने का आदेश दिया। इस दौरान पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्हें भी सदन से बाहर कर दिया गया। मार्शल द्वारा बाहर निकाले जाने के दौरान विधायक लोन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “विडंबना है कि NC के विधायक अपनी ही पार्टी के स्पीकर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह जनता को गुमराह करने की साज़िश है।”

हंगामे की शुरुआत सोमवार को हुई थी जब वक्फ कानून पर चर्चा की मांग को लेकर NC विधायकों ने इसे मुस्लिम विरोधी बताया और जोरदार विरोध दर्ज कराया। वहीं भाजपा विधायकों ने इस आरोप का तीखा विरोध किया, जिससे सदन में तीखी बहस और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। कांग्रेस विधायक इरफान अहमद लोन और भाजपा विधायक सतीश शर्मा के बीच झड़प भी हुई।

मंगलवार को यह विवाद और गहराया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लार्मी ने PDP विधायक पारा को “RSS का एजेंट” कह दिया, जिससे विपक्षी दलों में तीखी नोकझोंक हो गई। इसी दौरान आम आदमी पार्टी के विधायक महाराज मलिक और भाजपा विधायक विक्रम रंधावा द्वारा मुफ्ती मोहम्मद सईद पर की गई टिप्पणी को लेकर आप विधायक और PDP प्रवक्ता मोहित के बीच बहस तेज हो गई, जिसने सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।

लगातार दूसरे दिन हंगामे के चलते प्रश्नकाल की कार्यवाही नहीं हो सकी। स्पीकर ने सदन को आधे घंटे के लिए स्थगित किया, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई।

गौरतलब है कि यह बजट सत्र का दूसरा चरण है, जो 13 दिन के अंतराल के बाद शुरू हुआ है। पहले ही दिन वक्फ कानून को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की मांग विपक्ष ने की थी, जिसे स्पीकर ने अस्वीकार कर दिया, जिससे विवाद की शुरुआत हुई।

इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि वक्फ कानून को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव आगे भी जारी रह सकता है, जिससे विधानसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो सकती है।

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