11 फरवरी महाकाल आरती: चांदी का नेत्र और त्रिशूल अर्पित, बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, भस्म आरती में गूंजे जयकारे

(विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट) :
उज्जैन (शिखर दर्शन) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर दिव्य आराधना का आयोजन हुआ। मंगलवार प्रातः 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सबसे पहले भगवान महाकाल का जल से अभिषेक किया गया, जिसके बाद पंचामृत—दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से विशेष पूजन संपन्न हुआ।
भगवान महाकाल को पारंपरिक भस्म चढ़ाई गई और उन्हें शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की माला से श्रृंगारित किया गया। भक्तों की आस्था को देखते हुए इस अवसर पर बाबा को चांदी का नेत्र और त्रिशूल अर्पित किया गया, जिससे उनका दिव्य श्रृंगार और भी अलौकिक प्रतीत हो रहा था। भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया।
प्रातःकालीन भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालु नंदी महाराज के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं व्यक्त कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। इस दौरान पूरा मंदिर “जय जय श्री महाकाल”, “हर हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के उद्घोषों से गूंजायमान हो उठा। भक्तों की अपार आस्था और दिव्यता से ओतप्रोत इस अनूठे आयोजन में शामिल होकर श्रद्धालु अभिभूत हो उठे।
घर बैठे करें महाकाल दर्शन
जो भक्त महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर नहीं पहुंच सके, वे ऑनलाइन माध्यम से सीधा प्रसारण देख सकते हैं।

महाकाल मंदिर प्रशासन द्वारा इसकी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि विश्वभर के श्रद्धालु घर बैठे इस आध्यात्मिक अनुभूति का लाभ उठा सकें।



