उत्तरप्रदेश

महा कुंभ 2025: आज संगम में डुबकी लगाएंगे गुजरात के मुख्यमंत्री, राज्यसभा के उपसभापति भी करेंगे गंगा स्नान

प्रयागराज (शिखर दर्शन) // महाकुंभ 2025 का भव्य आयोजन अपने 26वें दिन में प्रवेश कर चुका है। संगम नगरी में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता की चर्चा सात समंदर पार तक हो रही है, जिससे विदेशी पर्यटक भी भारतीय संस्कृति का अनुभव करने आ रहे हैं।

गुरुवार को हरियाणा और मणिपुर के मुख्यमंत्री संगम में स्नान कर चुके हैं। आज गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास भी त्रिवेणी संगम में पुण्य स्नान करेंगे।

अब तक कई दिग्गज कर चुके हैं स्नान

महाकुंभ 2025 में अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनका पूरा मंत्रिमंडल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, अभिनेता व सांसद रवि किशन, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल और भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां आस्था की डुबकी लगा चुकी हैं।

महाकुंभ में श्रद्धालुओं का जनसैलाब

इस बार महाकुंभ में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा है। अब तक 39 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके हैं। बसंत पंचमी के अवसर पर डेढ़ करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में शाही स्नान किया और मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा, 10 लाख से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में कल्पवास कर रहे हैं।

महाकुंभ का पौराणिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के लिए देवताओं और असुरों के बीच 12 दिनों तक घमासान युद्ध हुआ। इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें धरती पर चार स्थानों—प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक—पर गिरीं। इन्हीं स्थानों पर हर 12वें वर्ष कुंभ का आयोजन होता है।

ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के आधार पर कुंभ मेले का आयोजन अलग-अलग स्थानों पर होता है:

  • जब गुरु वृषभ राशि और सूर्य मकर राशि में होते हैं, तो प्रयागराज में कुंभ आयोजित किया जाता है।
  • जब गुरु और सूर्य सिंह राशि में होते हैं, तो नासिक में कुंभ का आयोजन होता है।
  • गुरु सिंह राशि और सूर्य मेष राशि में हों, तो उज्जैन में कुंभ मेला लगता है।
  • सूर्य मेष राशि और गुरु कुंभ राशि में होने पर हरिद्वार में कुंभ मेला आयोजित किया जाता है।

महा कुंभ 2025 अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक भव्यता के कारण ऐतिहासिक बन चुका है, जहां आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

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