6 फरवरी महाकाल आरती: त्रिशूल अर्पित कर बाबा महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, मंदिर गूंज उठा जयकारों से

विशेष संवाददाता छमू गुरु की रिपोर्ट:
उज्जैन (शिखर दर्शन) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार को माघ माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महाकाल का सबसे पहले जल से अभिषेक किया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भव्य अभिषेक पूजन संपन्न हुआ।
भगवान महाकाल को भस्म चढ़ाकर शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी मालाओं से अलौकिक श्रृंगार किया गया। बाबा को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। विशेष रूप से उनके मस्तक पर रजत मुकुट समर्पित कर ड्रायफ्रूट से अद्भुत श्रृंगार किया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य प्रतीत हो रहा था।
भस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भक्तों ने श्री महाकाल के अत्यंत करीब रहने वाले नंदी महाराज के समीप जाकर उनके कानों में अपनी मनोकामनाएँ कहकर भोलेनाथ तक पहुँचाने की विनती की। श्री महाकाल मंदिर की दसों दिशा भक्तों के जयकारे “जय जय श्री महाकाल, हर हर महादेव, हर हर शंभू, ॐ नमः शिवाय” से गूंजयमान हो रही थी।
मंदिर परिसर में चारों ओर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा था, भक्तों की श्रद्धा और उत्साह ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।



