आठवीं कक्षा की छात्रा ने फीस न भरने पर परीक्षा से रोके जाने के बाद की आत्महत्या

सूरत (शिखर दर्शन) // सूरत में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां आठवीं कक्षा की छात्रा ने सोमवार की रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा के परिवार के अनुसार, घटना के समय पूरा परिवार घर से बाहर था। मृतक छात्रा के पिता ने स्कूल प्रशासन को इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया, उनका आरोप है कि स्कूल ने उनकी बेटी को परीक्षा में बैठने से केवल इसलिए रोका क्योंकि वे फीस समय पर जमा नहीं कर पाए थे। स्कूल द्वारा परीक्षा से बाहर किए जाने के बाद छात्रा को क्लासरूम के बाहर बहुत देर तक खड़ा रखा गया था, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हो गई।
राजूभाई खटीक, जो सूरत के गोडादरा क्षेत्र के निवासी हैं, ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी एक प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही थी, लेकिन आठवीं कक्षा में फीस न भर पाने के कारण स्कूल ने उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी। छात्रा घर लौटते समय बेहद उदास और रोती हुई थी। बाद में उन्होंने यह दुखद कदम उठाया।
स्कूल के प्रिंसिपल ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि छात्रा के माता-पिता से कई बार फीस को लेकर संपर्क किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल कभी भी बच्चों पर फीस का दबाव नहीं बनाता और सीधे तौर पर अभिभावकों से संपर्क करता है।
घटना के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री प्रफुल्ल पनसेरिया ने दुख जताया और मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया। जिला शिक्षा अधिकारी की टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों से बयान लिए। टीम ने स्कूल प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज की भी मांग की है, लेकिन अभी तक स्कूल प्रबंधन की ओर से गोलमोल जवाब मिल रहे हैं।
इस बीच, पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान एक छात्रा ने यह भी दावा किया कि मृतक छात्रा एक लड़के से मोबाइल ऐप पर बातचीत कर रही थी, जिसे उसके पिता ने रिकॉर्ड किया और डांटा था, जिसके बाद वह मानसिक तनाव में आ गई थी। मृतक के पिता ने इंसाफ की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की घटना किसी और बच्चे के साथ नहीं होनी चाहिए।
यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि बच्चों और उनके अभिभावकों के मानसिक स्वास्थ्य और भलाई के लिए स्कूलों को और अधिक संवेदनशील और सहायक बनने की आवश्यकता है।



