बस्तर संभाग

बस्तर: नक्सल प्रभावित बस्तर में हो रही काजू की बंपर पैदावार, हजारों परिवारों के लिए बना आय का जरिया

बस्तर में काजू की खेती यहां ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रोजगार का एक बड़ा जरिया बना हुआ है. यहां हर साल 50 हजार क्विंटल से ज्यादा का पैदावार हो रहा है.

छत्तीसगढ़ का बस्तर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ यहां मिलने वाली वन संपदाओं के लिए भी पूरे देश में जाना जाता है. आदिवासी बाहुल क्षेत्र बस्तर में आदिवासियों के मुख्य आय का स्रोत भी यहां के जंगलों में मिलने वाले वनोपज है. लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण इन वन संपदा पर ही आश्रित हैं और उनके मुख्य आय का जरिया भी वन संपदा है. खासकर बस्तर में ईमली, महुआ, टोरा, कोदो, कुटकी, रागी और काजू की बड़ी मात्रा में पैदावार होती है.

बस्तर जिले का बकावंड ब्लॉक काजू के प्लांटेशन क्षेत्र के लिए ही जाना जाता है. बस्तर के वन संपदा में काजू सबसे महत्वपूर्ण फलदार वृक्षों में से एक है, खास बात यह है कि बस्तर का काजू ठोस और ज्यादा स्वादिष्ट होने की वजह से इसकी डिमांड पूरे देश विदेश में है. लाल आतंक के गढ़ कहे जाने वाले बस्तर में इन दिनों आदिवासी बड़े पैमाने पर काजू की खेती कर रहे हैं. मेवों का राजा कहे जाने वाले काजू की महक और स्वाद से पूरा इलाका आबाद हो रहा है, यहां के काजू की प्रसिद्धि अब छत्तीसगढ़ से निकलकर देश दुनिया में फैलने लगी है ,जिसके बाद यहां के आदिवासी काजू की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.

5-6 साल में तैयार होते हैं काजू के पेड़
बकावंड ब्लॉक में ही मौजूद दशापाल पंचायत में 20 साल पहले 3 एकड़ की जमीन में काजू का प्लांटेशन किया गया था और 5 से 6 साल में काजू के पौधे पेड़ बनकर तैयार हो गए हैं और इसमें काजू फल भी होने लगे हैं. इस गांव के सरपंच ने बताया कि बस्तर में काजू प्लांटेशन के लिए मिट्टी और आबोहवा सही होने से अधिकतर ग्राम पंचायत में काजू के प्लांटेशन किए जाते हैं. तोड़े गए काजू के फलों को 100 से 120 रुपए प्रति किलो हिसाब से बेचा जाता है. सरपंच का कहना है कि शासन प्रशासन अगर किसानों को प्रोत्साहित करें तो ज्यादा से ज्यादा बस्तर के किसान अपने निजी भूमि में काजू का प्लांटेशन कर सकते हैं और उन्हें इससे अच्छी कमाई भी होगी और ग्रामीणों को और भी फायदा मिलेगा.

10 हजार परिवार उत्पादन में जुटा
डीएफओ ने बताया कि वन विभाग की तरफ से क्षेत्र में काजू के अच्छे पैदावार के लिए ज्यादा से ज्यादा प्लांटेशन किया जा रहा है, और इसके लिए वन विभाग के साथ-साथ उद्यानिकी विभाग और मनरेगा के तहत भी प्लांटेशन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि बकावंड ब्लॉक में प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाया गया है, जहां स्थानीय महिला स्व सहायता समूह के जरिए काजू का प्रोसेसिंग किया जा रहा है और उसके बाद इसे बस्तर काजू के नाम से पैकेजिंग कर मार्केट में बेचा जा रहा है. हर साल 50 हजार क्विंटल से ज्यादा काजू का उत्पादन हो रहा है. खास बात यह है कि बस्तर में काजू उत्पादन में 10 हजार परिवार जुड़े हैं और हर परिवार को औसतन 10 हजार रुपये की कमाई होती है.

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