होलिका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं लोग , छत्तीसगढ़ के इस गांव में प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा….
गरियाबंद //राजिम/( शिखर दर्शन)//देशभर में होली का महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है लोग अलग-अलग तरीकों से रंगों का त्यौहार मना रहे हैं । होली के इस अवसर पर हर कोने-कोने में हर्षोल्लास का दृश्य देखने को मिल रहा है।होली के एक दिन पहले होलीका दहन को लोग अपनी परंपरागत शैली से मनाते हैं होलिका दहन का एक अद्भुत दृश्य
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के एक गांव में देखने को मिला । यहां के लोग होलिका दहन के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हुए नजर आए । इसमें किसी को भी कोई हानि नहीं होती है यहां इस प्राचीन परंपरा को देखकर हर कोई हैरान हो जाता है ।

गरियाबंद जिला के ग्राम छेराकोठी गांव जो कि उड़ीसा राज्य की सीमा से लगे सरायपाली गांव के समीप स्थित है ,यहां होलिका दहन के बाद धधकते अंगारे पर ग्रामीणों का नंगे पांव चलने का रिवाज प्राचीन काल से चला आ रहा है । लोगों का मानना है कि होलिका दहन के बाद बने अंगार पर चलने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं । पूर्वजों काल से चली आ रही इस परंपरा को लोग अत्यंत खुशी और उत्साह के साथ आज भी स्वीकार करते हैं । लोगों की इस बात पर बहुत अधिक आस्था और विश्वास है की परंपरा को मानने से गांव में किसी प्रकार की विपदा नहीं आती है । और शांति बनी रहती है , और ना ही गांव में किसी प्रकार की संक्रामक बीमारी का प्रकोप होता है । लोग होलिका दहन के पहले ग्राम देवी डोकरी दाई का स्मरण करते हैं । सबसे पहले पुजारी जलते हुए अंगारे को नंगे पांव पर करते हैं । इसके बाद उनके पीछे अन्य ग्रामीण नंगे पांव ग्राम देवी का नाम लेते हुए इसे पार करते हैं । होलीका दहन में जलाऊ लड़कियों और गाय के गोबर से बने कंडे का उपयोग किया जाता है । इसके बाद ग्रामीण राख के ठंडा हो जाने पर उसे अपने घर ले जाते हैं और उसका टीका भी लगते हैं इसके बाद ही होली मनाई जाती है ।

