मतदाताओं के बाद अब साधु-संतों को धमकी!

बंगाल में बढ़ते आरोपों के बीच चुनाव आयोग सख्त, पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल
कोलकाता ( शिखर दर्शन ) // पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। पहले मतदाताओं को धमकाने के आरोप सामने आए, और अब साधु-संतों को कथित तौर पर डराने-धमकाने का मामला सुर्खियों में है। इन घटनाओं के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मुर्शिदाबाद में मतदाताओं को धमकाने का मामला
चुनाव आयोग के निर्देश पर पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस नेता राजू मंडल को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने मतदाताओं को एक खास पार्टी के पक्ष में वोट देने का दबाव बनाया। आयोग ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश माना है।
इसके अलावा दक्षिण 24 परगना के कैनिंग क्षेत्र में पंचायत प्रधान पर भी मतदाताओं को धमकाने के आरोप लगे हैं, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
भवानीपुर में साधु-संतों से बदसलूकी का आरोप
कोलकाता के भवानीपुर इलाके में वार्ड 70 के पार्षद असीम बसु और उनके समर्थकों पर साधु-संतों को धर्म प्रचार से रोकने का आरोप लगा है। जानकारी के अनुसार, संत धार्मिक पर्चे बांट रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोकते हुए कथित रूप से बदसलूकी की।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे विवाद और गहरा गया है। आरोप है कि कुछ लोग आश्रम तक भी पहुंच गए और वहां मौजूद संतों को धमकाया गया।
‘दीदी’ के नेतृत्व पर भी उठे सवाल
इन घटनाओं के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर विपक्ष निशाना साध रहा है। विपक्ष का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हो रही है और राजनीतिक संरक्षण में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
चुनाव आयोग सख्त, पुलिस पर सवाल
जहां एक ओर चुनाव आयोग ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई मामलों में अभी तक स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
चुनावी माहौल के बीच सामने आ रही ये घटनाएं राज्य की राजनीति को और गर्मा रही हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।



