बिलासपुर संभाग

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्ती: अब कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के लिए नहीं कर सकेंगे बाध्य

डीईओ का सख्त आदेश, अभिभावकों को मिली राहत, तय दुकानों से खरीद की अनिवार्यता खत्म

बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब लगाम कस दी गई है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने कलेक्टर के निर्देश पर सख्त आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब कोई भी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों को किसी तय दुकान से कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा।

प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों में सामने आया था कि कई निजी स्कूल छात्रों और अभिभावकों पर दबाव बनाकर निर्धारित दुकानों से ही सामग्री खरीदने को मजबूर कर रहे थे। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। दुकानदार भी पूरा सेट खरीदने के लिए बाध्य करते थे, जिसमें कई गैर-जरूरी और महंगे सामान शामिल होते थे।

इसी को ध्यान में रखते हुए डीईओ ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिए हैं। अब विद्यार्थी कहीं से भी कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म खरीद सकेंगे। स्कूल प्रबंधन किसी विशेष दुकान या संस्था से खरीद के लिए दबाव नहीं बना सकेगा।

सभी स्कूलों को अनिवार्य पुस्तकों की सूची परीक्षा परिणाम से पहले अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होगी। साथ ही, अभिभावकों को भी यह सूची उपलब्ध कराई जाएगी। किताबें खरीदने के लिए 15 जून तक का समय दिया गया है, जिससे अभिभावकों पर तत्काल खरीद का दबाव न बने।

आदेश के अनुसार, स्कूल केवल अधिकृत संस्थाओं जैसे NCERT, SCERT या पाठ्य पुस्तक निगम की पुस्तकों को ही पाठ्यक्रम में शामिल कर सकेंगे। निजी प्रकाशकों की किताबों को अनिवार्य करने पर रोक लगा दी गई है।

विक्रेताओं द्वारा पूरा सेट बेचने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है। अब अनावश्यक सामग्री को जबरन शामिल नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, स्कूल बैग, कॉपी या कवर पर स्कूल का नाम प्रिंट करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

यूनिफॉर्म को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। कोई भी स्कूल दो से अधिक प्रकार की यूनिफॉर्म निर्धारित नहीं करेगा और उसमें कम से कम तीन साल तक बदलाव नहीं किया जाएगा। यदि बदलाव करना हो तो छह महीने पहले अभिभावकों को सूचना देना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा, सभी स्कूलों को अपने गेट या सूचना पटल पर मान्यता कोड और संबद्धता की जानकारी प्रदर्शित करनी होगी तथा फीस विनियमन अधिनियम 2020 का पालन करना होगा।

डीईओ ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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