7 अप्रैल महाकाल आरती: मस्तक पर त्रिशूल-त्रिनेत्र और त्रिपुंड अर्पित कर दिव्य श्रृंगार

तड़के 4 बजे खुले मंदिर के कपाट, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु
उज्जैन (शिखर दर्शन) //
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि मंगलवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। बाबा महाकालेश्वर के मस्तक पर त्रिशूल, त्रिनेत्र और त्रिपुंड अर्पित कर भव्य श्रृंगार किया गया।
भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके पश्चात शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से भगवान का अलंकरण किया गया।
सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान पूरा मंदिर बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान होता रहा।




