भोजशाला पर हाईकोर्ट में गरमाई बहस: 2 घंटे चली सुनवाई, 10-11वीं शताब्दी के साक्ष्यों पर जोर

1935 के बोर्ड का दिया गया हवाला, ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों पर हुई तीखी दलीलें; कल फिर होगी सुनवाई
इंदौर/धार (शिखर दर्शन) // Bhojshala विवाद एक बार फिर Madhya Pradesh High Court में गूंजा, जहां सोमवार को करीब 2 घंटे तक इस संवेदनशील मामले में विस्तृत सुनवाई हुई।
ऐतिहासिक साक्ष्यों पर जोर
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने पक्ष रखते हुए भोजशाला के ऐतिहासिक स्वरूप को विस्तार से प्रस्तुत किया।
उन्होंने विशेष रूप से 10वीं और 11वीं शताब्दी के कालखंड का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय यह स्थल धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण था।
1935 के बोर्ड को बनाया आधार
बहस के दौरान वर्ष 1935 में भोजशाला परिसर में लगाए गए एक बोर्ड को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में पेश किया गया।
हिंदू पक्ष का तर्क था कि उस समय प्रशासनिक स्तर पर भी इस स्थल की पहचान को लेकर स्पष्ट संकेत मौजूद थे।
ASI रिपोर्ट का भी हवाला
मामले में Archaeological Survey of India (ASI) की भूमिका भी केंद्र में रही।
हिंदू पक्ष ने एएसआई द्वारा किए गए सर्वे और उसकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए अपने दावों को मजबूत करने का प्रयास किया।
निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर दिया और स्पष्ट किया कि सुनवाई निष्पक्ष रूप से जारी रहेगी।
यह मामला लंबे समय से संवेदनशील बना हुआ है, जिसके सामाजिक और धार्मिक पहलुओं को देखते हुए हर सुनवाई पर लोगों की नजर बनी हुई है।
कल फिर होगी सुनवाई
अब इस मामले में अगली सुनवाई कल तय की गई है, जहां अन्य पक्ष भी अपने तर्क और साक्ष्य कोर्ट के सामने पेश करेंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।



