नाबालिग अपहरण मामले में हाईकोर्ट सख्त: छुट्टी में सुनवाई, पुलिस को लगाई फटकार

इंदौर (शिखर दर्शन) // महू के बडगोंदा थाना क्षेत्र में नाबालिग किशोरी के अपहरण मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अवकाश के दिन हुई विशेष सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए 6 अप्रैल तक अपहृत बालिका और आरोपियों को पेश करने का आदेश दिया है।
डेढ़ महीने तक कार्रवाई नहीं, कोर्ट पहुंचा परिवार
मामला 23 फरवरी का बताया जा रहा है, जब अनुसूचित जाति की 17 वर्षीय किशोरी का कथित रूप से अपहरण कर लिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शुरुआत से ही मुख्य आरोपी पवन सिंह का नाम पुलिस को बताया गया, लेकिन एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई।
इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि जब बालिका के चाचा थाने पहुंचे तो उनके साथ मारपीट भी की गई। बाद में पुलिस ने मामला दर्ज तो किया, लेकिन नामजद आरोपी के बजाय ‘अज्ञात’ के खिलाफ केस दर्ज कर दिया।
हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई
लगातार पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर पीड़ित पिता ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट की डबल बेंच ने छुट्टी के दिन भी सुनवाई की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शुभम मांडिल और गौरव गुप्ता ने पक्ष रखते हुए बताया कि बालिका आरोपी की अवैध हिरासत में है।
कोर्ट ने जताई नाराजगी, दिया सख्त आदेश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि आरोपी का नाम सामने होने के बावजूद ‘अज्ञात’ के खिलाफ मामला क्यों दर्ज किया गया। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को निर्देश देते हुए कहा कि हर हाल में 6 अप्रैल तक बालिका को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
हरकत में आई पुलिस
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस की कार्यशैली में भी बदलाव देखने को मिला। शनिवार को ही बडगोंदा थाना पुलिस सक्रिय हुई और पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर मामले की दोबारा जांच शुरू की।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर नजर रखते हुए आगे की कार्रवाई जारी है।



