छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 सदन में पेश: जबरन और लालच देकर धर्मांतरण पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान, जानें प्रमुख बिंदु…

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // प्रदेश में लंबे समय से धर्मांतरण को लेकर चल रहे आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बहस के बीच गुरुवार को साय सरकार ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पेश कर दिया। संभावना जताई जा रही है कि बजट सत्र के अंतिम दिन इस विधेयक को सदन से पारित किया जा सकता है। प्रस्तावित कानून को राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर कड़ा और व्यापक नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पुराने कानून की जगह लेगा नया विधेयक
यह विधेयक वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968 का स्थान लेगा। पुराने कानून में धर्म परिवर्तन के बाद केवल जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देने का प्रावधान था और जबरन धर्मांतरण को संज्ञेय एवं जमानतीय अपराध माना गया था, जिसमें अपेक्षाकृत हल्की सजा का प्रावधान था।
सरकार का तर्क है कि बदलते सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में पुराने प्रावधान अपर्याप्त हो गए हैं, इसलिए एक सख्त और व्यापक कानून की आवश्यकता महसूस की गई।
कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
नए विधेयक में अवैध धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है—
- जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना
- यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग से है तो 10 से 20 साल की सजा और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना
- सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना
इसके साथ ही सभी अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया है और मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालयों में होगी।
इन तरीकों से धर्मांतरण पूरी तरह प्रतिबंधित
विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि बल प्रयोग, प्रलोभन, दबाव, कपट, मिथ्या जानकारी, अनुचित प्रभाव या महिमामंडन के जरिए धर्म परिवर्तन कराना अवैध माना जाएगा।
साथ ही, डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण, प्रलोभन और उत्पीड़न जैसे शब्दों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे कानून के दायरे को और मजबूत बनाया गया है।
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन के लिए भी प्रक्रिया तय
यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को सूचना देनी होगी।
- प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी
- 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा
शादी और धर्मांतरण पर भी नजर
विधेयक में विवाह से जुड़े धर्मांतरण मामलों पर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
- अंतरधार्मिक विवाह कराने वाले फादर, पादरी, मौलवी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति को विवाह से 8 दिन पहले घोषणा पत्र देना होगा
- सक्षम प्राधिकारी यह जांच करेगा कि विवाह धर्मांतरण के उद्देश्य से तो नहीं किया जा रहा
- यदि ऐसा पाया जाता है, तो विवाह को अवैध घोषित किया जा सकता है
‘घर वापसी’ को नहीं माना जाएगा धर्मांतरण
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी (घर वापसी) को धर्मांतरण की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 को राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर सख्त नियंत्रण और स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिस पर अब सदन में अंतिम मुहर लगना बाकी है।



