मध्यप्रदेश

श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर श्रद्धा का महाप्रवाह: दोपहर 2 बजे तक ढाई लाख भक्तों ने किए दर्शन, शिखर पर चढ़ी नई धर्मध्वजा

44 घंटे खुले रहेंगे महाकाल मंदिर के पट: दोपहर 2 बजे तक ढाई लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

विशेष संवाददाता छमू गुरु की रीपोर्ट :

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) // मध्यप्रदेश के उज्जैन मे स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दोपहर 2 बजे तक लगभग ढाई लाख श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। खास बात यह है कि महापर्व के अवसर पर मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक खुले रहेंगे, जिससे देश-विदेश से आए श्रद्धालु निर्बाध दर्शन कर सकें।

भक्ति और भावनाओं से सराबोर रहा मंदिर परिसर

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर जब श्रद्धालु गर्भगृह के समीप पहुंचे तो कई भक्तों की आंखें नम हो गईं, तो कई के चेहरों पर अद्भुत संतोष और श्रद्धा के भाव झलकते दिखाई दिए। पूरा मंदिर परिसर “जय जय श्री महाकाल” और “हर-हर महादेव” “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंज उठा।

विशेष पूजन, भस्म आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भक्तों का आना लगातार जारी रहा।

देश-विदेश से उमड़ा आस्था का सैलाब

महाशिवरात्रि पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर एवं मंदिर समिति अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने दर्शन मार्ग और मंदिर परिसर का लगातार निरीक्षण किया।

प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है।

मंदिर शिखर पर चढ़ाई गई नवीन ध्वजा

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान महाकाल के मंदिर शिखर पर नवीन ध्वजा अर्पित की गई। ध्वजा पूजन श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महंत विनीत गिरी महाराज द्वारा विधिवत किया गया।

कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और बड़ी संख्या में भक्त सुव्यवस्थित तरीके से दर्शन कर रहे हैं। प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

महाशिवरात्रि पर उज्जैन एक बार फिर शिवमय नजर आया, जहां आस्था, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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