मध्यप्रदेश

क्या जेब तय करेगी दर्शन का अधिकार ? देवतालाब में 250 रुपये में ‘तत्काल दर्शन’, लंबी कतार में इंतजार करते श्रद्धालु

मऊगंज में महाशिवरात्रि पर ‘तत्काल दर्शन’ व्यवस्था से उठे सवाल: 250 रुपये की पर्ची से वीआईपी एंट्री, घंटों लाइन में आम श्रद्धालु

रीवा / मऊगंज ( शिखर दर्शन ) // महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जहां देशभर में भगवान भोलेनाथ की आराधना का उत्साह दिखा, वहीं मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में स्थित ऐतिहासिक देवतालाब शिव मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आस्था के इस प्रमुख केंद्र में एक ओर श्रद्धालु 200 मीटर लंबी कतार में घंटों इंतजार करते रहे, तो दूसरी ओर 250 रुपये की पर्ची ने कुछ भक्तों को सीधे गर्भगृह तक पहुंचा दिया।

स्थापत्य का चमत्कार, व्यवस्था पर सवाल

देवतालाब शिव मंदिर अपनी अद्वितीय स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यह मंदिर बिना चूना-गारे के पत्थरों को जोड़कर निर्मित किया गया है। गर्भगृह अत्यंत संकीर्ण है, जहां एक समय में सीमित संख्या में ही श्रद्धालु प्रवेश कर सकते हैं। मंदिर की संरचना इतनी अनोखी बताई जाती है कि जोड़ तक स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते।

लेकिन महाशिवरात्रि के अवसर पर लाखों की भीड़ उमड़ने के बीच इसी संकीर्ण गर्भगृह के बाहर बनाई गई ‘तत्काल दर्शन’ व्यवस्था ने कई सवाल खड़े कर दिए।

3 घंटे की प्रतीक्षा बनाम मिनटों में दर्शन

मंदिर परिसर में करीब 200 मीटर लंबी कतार में श्रद्धालु 2 से 3 घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए। गर्मी और भीड़ के बीच महिलाएं, बुजुर्ग और ग्रामीण श्रद्धालु धैर्यपूर्वक लाइन में खड़े रहे।

इसी दौरान 250 रुपये की रसीद कटवाने पर ‘तत्काल दर्शन’ की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी। इस व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं को सामान्य कतार से अलग सीधे दर्शन कराए जा रहे थे। इससे आम भक्तों के बीच असंतोष की स्थिति भी देखने को मिली।

विकास की घोषणाएं, बुनियादी सुविधाओं का अभाव

देवतालाब क्षेत्र पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम का विधानसभा क्षेत्र है। हाल के वर्षों में मंदिर के जीर्णोद्धार और ‘शिवलोक’ निर्माण को लेकर करोड़ों रुपये के प्रस्ताव और पर्यटन विभाग से अनुमान तैयार होने की चर्चाएं रही हैं।

इसके बावजूद, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं—जैसे सुलभ शौचालय, पेयजल और व्यवस्थित प्रतीक्षा स्थल—पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं दिखीं। ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि क्या धार्मिक आस्था के केंद्रों पर सुविधाएं समान रूप से उपलब्ध नहीं होनी चाहिए?

प्रशासन का पक्ष: समय बचाने की व्यवस्था

मऊगंज तहसीलदार वीरेंद्र पटेल ने ‘तत्काल दर्शन’ व्यवस्था को प्रशासनिक निर्णय बताते हुए कहा कि जिन श्रद्धालुओं के पास समय का अभाव है, उनके लिए यह सुविधा दी गई है। सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

वहीं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने बताया कि जिले में महाशिवरात्रि का पर्व शांतिपूर्ण और धूमधाम से मनाया गया। जिले के तीन प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्था के पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।

आस्था बनाम व्यवस्था पर बहस

महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर जहां भक्ति और समानता का संदेश प्रमुख होता है, वहीं ‘शुल्क आधारित दर्शन’ व्यवस्था ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या धार्मिक स्थलों पर दर्शन का अधिकार आर्थिक स्थिति से जुड़ना चाहिए?

मऊगंज के देवतालाब शिव मंदिर में इस बार महाशिवरात्रि सिर्फ श्रद्धा का उत्सव नहीं रहा, बल्कि आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन पर सवाल भी छोड़ गया।

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