बिलासपुर संभाग

लक्ष्मणेश्वर, लिंगेश्वर और कलेश्वरनाथ मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़…

जांजगीर-चांपा में महाशिवरात्रि पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, मंदिरों में दिखी भव्य आराधना

जांजगीर-चांपा ( शिखर दर्शन ) // महाशिवरात्रि के अवसर पर जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। खरौद का लक्ष्मणेश्वर मंदिर, नवागढ़ का लिंगेश्वर महादेव मंदिर और पीथमपुर का बाबा कलेश्वरनाथ मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र बन गए। मंदिर समितियों ने विशेष तैयारियां की थीं और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया था।

खरौद का लक्ष्मणेश्वर मंदिर: अक्षय कुंड में शिव की आराधना

शिवरीनारायण क्षेत्र, जिसे रामायण काल से जुड़ा माना जाता है, प्राचीन दंडकारण्य का हिस्सा है। शिवरीनारायण से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित खरौद, जिसे ‘खर और दूषण की नगरी’ भी कहा जाता है, में विराजमान लक्ष्मणेश्वर शिवलिंग लाखों सूक्ष्म छिद्रों वाला माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस शिवलिंग में जल स्तर न तो घटता है और न बढ़ता है, इसलिए इसे अक्षय कुंड भी कहा जाता है। यहां के जल को गंगा, यमुना और सरस्वती के समान पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद लक्ष्मण जी ने ब्राह्मण रावण वध के पाप से मुक्ति पाने के लिए इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी। मंदिर में ‘लाख चावल’ चढ़ाने की परंपरा विशेष आस्था का केंद्र है।

नवागढ़ का लिंगेश्वर महादेव मंदिर: स्वयंभू शिवलिंग की अनोखी मान्यता

नवागढ़ स्थित लिंगेश्वर महादेव मंदिर में विराजमान शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि शिवलिंग की ऊंचाई लगातार बढ़ रही है और इसकी मोटाई भी अनूठी है। शोधकर्ताओं ने इसकी वास्तविक गहराई जानने की कोशिश की, लेकिन अब तक इसका सही अनुमान नहीं लग पाया है। श्रद्धालु यहां वंश वृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।

पीथमपुर का कलेश्वरनाथ मंदिर: उदर रोगों से मुक्ति का केंद्र

हसदेव नदी के तट पर स्थित पीथमपुर में कलेश्वरनाथ बाबा शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, चांपा के एक जमींदार पेट संबंधी रोग से पीड़ित थे। इलाज से लाभ न मिलने पर उन्होंने भगवान शिव का स्मरण किया। स्वप्न में उन्हें पीथमपुर में शिवलिंग होने का संकेत मिला। खोज के दौरान शिवलिंग मिलने के बाद मंदिर की स्थापना की गई और जमींदार का रोग ठीक हो गया। तब से यह मंदिर उदर रोगों से मुक्ति पाने के लिए प्रसिद्ध है।

रंग पंचमी पर भव्य शिव बारात

महाशिवरात्रि के साथ-साथ रंग पंचमी के अवसर पर जिले में भव्य शिव बारात निकाली जाती है। पंचमुखी शिव की सवारी चांदी की पालकी में होती है। शोभायात्रा में वैष्णव और नागा साधु भी शामिल होते हैं। इसे देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

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