‘मजिस्ट्रेट महादेव’ की अनोखी अदालत: 7 दिन में होता है विवादों का निपटारा

ग्वालियर ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में भगवान शिव का एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जहां उन्हें श्रद्धालु ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ के नाम से पुकारते हैं। गिरगांव क्षेत्र में स्थित यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि विवादों के निपटारे की एक अनोखी परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्वयं महादेव न्यायाधीश बनकर सच और झूठ का फैसला करते हैं।

सात दिन में न्याय की मान्यता
जहां आम अदालतों में फैसले आने में वर्षों लग जाते हैं, वहीं मजिस्ट्रेट महादेव की कचहरी में श्रद्धालुओं का विश्वास है कि महज सात दिन में न्याय मिल जाता है। विवाद से जुड़े दोनों पक्ष भगवान के सामने ‘धरम’ यानी शपथ लेते हैं। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति झूठी कसम खाता है, उसे उसके कर्मों का परिणाम स्वयं महादेव देते हैं।
हजार वर्ष पुराना स्वयंभू मंदिर
ग्वालियर-भिंड रोड पर स्थित यह मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना और स्वयंभू माना जाता है। समय के साथ यह मंदिर आस्था के साथ-साथ न्याय की उम्मीद का भी केंद्र बन गया। छोटे पारिवारिक विवादों से लेकर बड़े मामलों तक, कई पंचायतें यहां महादेव के समक्ष शपथ लेकर सुलझाई जा चुकी हैं।
‘धरम’ उठाने के नियम

मंदिर में शपथ लेने की एक निर्धारित प्रक्रिया है—
- सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ही शपथ मान्य होती है।
- 20 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति और महिलाओं की शपथ स्वीकार नहीं की जाती।
- 20 हजार रुपये से कम राशि के विवाद पर शपथ मान्य नहीं होती।
- बिना पंचनामा के ‘धरम’ नहीं उठाया जाता।

महंत का दावा: सच-झूठ का होता है फैसला
मंदिर के मुख्य महंत अमर सिंह के अनुसार, गिरगांव के महादेव को लोग मजिस्ट्रेट महादेव कहते हैं, क्योंकि यहां सच और झूठ का निर्णय होता है। कई बार ऐसे विवाद, जो वर्षों से उलझे थे, यहां शपथ के बाद सुलझ गए। स्थानीय लोग बताते हैं कि पुलिस भी यहां हुए आपसी समझौते का सम्मान करती है।
आस्था का गहरा प्रभाव
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह कचहरी केवल विवाद सुलझाने का स्थान नहीं, बल्कि नैतिकता और सच्चाई बनाए रखने का माध्यम भी है। जब कानूनी प्रक्रियाएं लंबी और जटिल हो जाती हैं, तब लोग आस्था के साथ यहां पहुंचते हैं। हाल ही में एक दंपती ने पारिवारिक विवाद और बच्चे के गुम होने से जुड़े आरोपों के मामले में परिवार सहित महादेव के समक्ष शपथ ली और न्याय की उम्मीद जताई।
दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं लोग

मजिस्ट्रेट महादेव की ख्याति मध्य प्रदेश से बाहर भी फैल चुकी है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित अन्य राज्यों से भी लोग अपने विवादों के समाधान के लिए यहां आते हैं। आगरा निवासी हेमसिंह कुशवाह ने बताया कि जब उनके पारिवारिक विवाद का समाधान कहीं नहीं हुआ, तब उन्होंने यहां आकर शपथ ली और मामला सुलझ गया। तब से वे हर वर्ष दर्शन के लिए अवश्य आते हैं।
आस्था और न्याय का प्रतीक
मजिस्ट्रेट महादेव का यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और नैतिकता का प्रतीक बन चुका है। यहां न्याय की उम्मीद कानून की किताबों से नहीं, बल्कि श्रद्धा और सच्चाई की शपथ से जुड़ी है—और यही इसे ग्वालियर की एक अनोखी पहचान बनाता है।



