प्रतिभाओं का महाकुंभ: पचपेड़ी महाविद्यालय में 24वां वार्षिक स्नेह सम्मेलन हर्षोल्लास से संपन्न

पचपेड़ी / बिलासपुर ( शिखर दर्शन ) // तहसील पचपेड़ी स्थित संत गुरु घासीदास कला, विज्ञान एवं शिक्षा महाविद्यालय पचपेड़ी में 14 और 15 फरवरी को 24वां दो दिवसीय वार्षिक स्नेह सम्मेलन हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सम्मेलन के प्रथम दिवस पर विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन और सांस्कृतिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर संभाग के संभागायुक्त महादेव कावरे उपस्थित रहे। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने कुशाभाव ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति का पदभार भी ग्रहण किया है। श्री कावरे छत्तीसगढ़ कैडर के वर्ष 2008 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रबंधक समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रेमचंद जायसी ने की, जबकि सचिव प्रबंधक श्री जितेन्द्र कुमार पाटले विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रविंद्र जायसी ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्रों की छिपी हुई प्रतिभाएं उजागर होती हैं, जिससे उनके आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का सामाजिक विकास होता है।

सम्मेलन के दौरान महाविद्यालय के टॉपर, खेलकूद एवं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र, शील्ड और शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के चेहरे पर सम्मान की चमक और अभिभावकों की आंखों में गर्व साफ दिखाई दे रहा था।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सत्कली बावरे, श्रीमती करुण्डा चंद्रा प्रकाश सूर्या (छत्तीसगढ़ प्रदेश अनुसूचित जाति महामंत्री) सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अतिथियों ने अपने संबोधन में शिक्षा को समाज की प्रगति की आधारशिला बताते हुए कहा कि शिक्षित युवा ही सामाजिक, आर्थिक और मानसिक विकास की दिशा तय करते हैं।

तहसील पचपेड़ी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश कुमार कांत, व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री सुरेश खटकर, सदानंद दिव्य, रमेश सूर्यकांत, पत्रकार बंधु, छात्र-युवा साथी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
दो दिवसीय इस स्नेह सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक नेतृत्व की आधारभूमि भी है।



