“सिर्फ 10 मिनट का समय चाहिए…” 19 साल के छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में पेश की दलील, जानें पूरी कहानी

मध्य प्रदेश के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी को NEET EWS कोटे में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // मध्य प्रदेश के 19 वर्षीय अथर्व चतुर्वेदी ने NEET EWS कोटे के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS प्रवेश पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट में जीत हासिल की है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से होने के बावजूद प्रवेश नहीं मिलने पर अथर्व ने खुद अपनी दलीलें पेश कीं और शीर्ष न्यायालय को प्रभावित किया।
अथर्व ने दो बार NEET परीक्षा पास की थी और 530 अंक प्राप्त किए, लेकिन प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS कोटे के अभाव के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिला। पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में भी उनकी याचिका खारिज हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में कहा था कि दलीलें सही हैं, लेकिन प्रवेश दिलाना न्यायसंगत नहीं। इसके बावजूद अथर्व ने हार नहीं मानी और जनवरी 2025 में पुनः याचिका दायर की।
फरवरी 2025 में ऑनलाइन सुनवाई के दौरान अथर्व ने कोर्ट से केवल 10 मिनट का समय मांगा, जो सुनकर न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत भी हैरान रह गए। इस सुनवाई में अथर्व ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS कोटे को लागू नहीं किया, जबकि वे इसके पात्र हैं। उन्होंने कहा कि पॉलिसी में कमी का नुकसान छात्रों को नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि योग्य EWS छात्रों को 2025-26 सत्र के लिए प्रोविजनल MBBS प्रवेश दिया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार सात दिनों के भीतर कॉलेज अलॉटमेंट सुनिश्चित करे।
अथर्व की इस जीत के साथ अब उनका डॉक्टर बनने का रास्ता साफ हो गया है और यह मामला छात्रों के अधिकारों की रक्षा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है।



