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Inside Story of Silver Crash: 24 घंटे में ढही चांदी की चमक, इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट से निवेशक सन्न

चांदी में बड़ा क्रैश, 1980 की यादें ताजा—एक झटके में डूबा निवेशकों का भरोसा , क्या 1980 जैसा काला दौर दोहराएगा बाजार ?

कमोडिटी मार्केट में शुक्रवार को जबरदस्त भूचाल आ गया। लगातार रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही चांदी की कीमतें एक ही झटके में धराशायी हो गईं। जिस धातु ने निवेशकों को भारी मुनाफा दिलाया था, उसी ने महज 24 घंटे में उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बाजार जानकार इसे चांदी के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मान रहे हैं।

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। सोने के वायदा भाव करीब 9 प्रतिशत तक नीचे कारोबार करते नजर आए।


MCX पर एक दिन में 96 हजार रुपये लुढ़की चांदी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को मार्च एक्सपायरी वाली चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 24 प्रतिशत टूट गई। एक ही दिन में लगभग 96,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया।

गिरावट के बाद चांदी का भाव करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गया। डराने वाली बात यह रही कि चांदी जितनी तेजी से ऊपर गई थी, उससे कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से नीचे आ गई।


1980 की ‘हंट ब्रदर्स’ घटना से हो रही तुलना

इस ऐतिहासिक गिरावट की तुलना बाजार विशेषज्ञ 1980 के दौर से कर रहे हैं, जब चांदी में जबरदस्त उछाल के बाद भारी क्रैश देखने को मिला था। उस समय अमेरिका के अरबपति कारोबारी हर्बर्ट हंट और बंकर हंट—जिन्हें हंट ब्रदर्स कहा जाता है—ने चांदी के बाजार में बड़ा दांव खेला था।


क्या था हंट ब्रदर्स का ‘सिल्वर गेम’

1970 के दशक में डॉलर का सोने से रिश्ता खत्म होने और गोल्ड स्टैंडर्ड हटने के बाद महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ी। इसी दौर में हंट ब्रदर्स ने चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हुए बड़े पैमाने पर खरीद शुरू की।

1973 से 1979 के बीच उन्होंने इतनी फिजिकल चांदी और वायदा सौदे खरीदे कि दुनिया की कुल चांदी सप्लाई के करीब एक-तिहाई हिस्से पर उनका कब्जा हो गया। नतीजा यह हुआ कि 1973 में 1.95 डॉलर प्रति औंस रहने वाली चांदी जनवरी 1980 तक करीब 50 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई।


‘सिल्वर थर्सडे’: जब एक दिन में 50% टूट गई थी चांदी

जब अमेरिकी नियामकों को बाजार में हेरफेर की भनक लगी, तो नियम सख्त कर दिए गए। मार्जिन नियम इतने कड़े हुए कि हंट ब्रदर्स नए सौदे नहीं कर पाए।

27 मार्च 1980 को चांदी की कीमतें एक ही दिन में करीब 50 प्रतिशत गिर गईं और भाव 11 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया। यह दिन आज भी इतिहास में ‘सिल्वर थर्सडे’ के नाम से दर्ज है।


इस बार क्यों टूटी चांदी की कीमत ?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक चांदी एक हाई-बिटा कमोडिटी है, जिसमें कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आम बात है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिससे दबाव बढ़ गया।

इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए फेडरल रिजर्व चेयरमैन के नाम के ऐलान के बाद डॉलर मजबूत हुआ। मजबूत डॉलर का सीधा असर सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ता है, जिससे उनकी मांग कमजोर होती है।

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