भारत की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल का गणतंत्र दिवस परेड में दमदार प्रदर्शन, दुश्मन के रडार रह जाएंगे बेबस

77वें गणतंत्र दिवस पर भारत का शक्ति प्रदर्शन: पहली बार दिखी हाइपरसोनिक मिसाइल LRAShM, हिंद महासागर में बढ़ेगी नौसेना की ताकत
नई दिल्ली ( शिखर दर्शन ) // 77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने दुनिया को अपनी अत्याधुनिक सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश दिया। कर्तव्य पथ पर पहली बार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा विकसित लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) को प्रदर्शित किया गया। यह मिसाइल विशेष रूप से भारतीय नौसेना के लिए तैयार की जा रही है और भविष्य की समुद्री युद्ध रणनीति में इसे भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’ माना जा रहा है।
LRAShM एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो अत्यधिक तेज रफ्तार और अनियमित उड़ान पथ के कारण दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है। यह मिसाइल पहले रॉकेट की मदद से ऊंचाई तक जाती है और फिर ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुंचती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हो जाता है।
तकनीकी विशेषताएं जो इसे बनाती हैं घातक
इस मिसाइल की वर्तमान रेंज लगभग 1500 किलोमीटर है, जबकि इसकी गति मैक 8 से मैक 10 तक बताई जा रही है। इतनी तेज रफ्तार के कारण यह दुश्मन के युद्धपोतों या एयरक्राफ्ट कैरियर को 15 मिनट से भी कम समय में निशाना बना सकती है। LRAShM विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है, जिससे यह बड़े समुद्री प्लेटफॉर्म को पूरी तरह नष्ट कर सकती है।
भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक बढ़त
LRAShM के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री हमले की क्षमता कई गुना मजबूत होगी। खासतौर पर चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के बीच यह मिसाइल भारत को निर्णायक रणनीतिक बढ़त दिलाएगी। दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिलने के कारण यह मिसाइल युद्ध की दिशा पलटने में सक्षम मानी जा रही है।
भविष्य की तैयारी और वैश्विक क्लब में भारत
DRDO के वैज्ञानिकों के अनुसार हाइपरसोनिक मिसाइलें भारत के भविष्य की रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा हैं। इस तकनीक के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो रहा है, जिनके पास हाइपरसोनिक हथियार क्षमता है—जैसे रूस, चीन और अमेरिका।
DRDO का लक्ष्य भविष्य में LRAShM की रेंज को बढ़ाकर 3000 से 3500 किलोमीटर तक ले जाने का है। इसके साथ ही एंटी-शिप के अलावा इसके लैंड-अटैक वर्जन पर भी काम किए जाने की संभावना है।
कुल मिलाकर, 77वें गणतंत्र दिवस पर LRAShM की झलक ने यह साफ कर दिया कि भारत न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक के साथ वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।




