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Copper Investment: सोना–चांदी के बाद तांबे पर निवेशकों की नजर, कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर

कमोडिटी बाजार में नया सितारा बना तांबा, सोना–चांदी के बाद क्यों बढ़ी हलचल

सोने और चांदी में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब निवेशकों का रुझान तांबे की ओर बढ़ता दिख रहा है। शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच कमोडिटी बाजार निवेश के नए विकल्प के रूप में उभर रहा है, जहां तांबे को अगला बड़ा दांव माना जा रहा है।

ग्लोबल मार्केट में रिकॉर्ड स्तर
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) के मुताबिक तांबा मार्च 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर 6 जनवरी 2026 को तांबे ने 6.069 डॉलर प्रति पाउंड का नया रिकॉर्ड बनाया। बीते एक साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की कीमत करीब 60 फीसदी तक बढ़ चुकी है।

भारत में भी मजबूत तेजी
भारत में भी तांबे के वायदा भाव में पिछले एक साल के दौरान लगभग 36 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी के साथ तांबा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कमोडिटीज में शामिल हो गया है।

क्यों बढ़ रही है तांबे की मांग?
तांबे की कीमतों में उछाल के पीछे कई अहम वजहें हैं।

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर का तेजी से विस्तार
  • डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत
  • रक्षा क्षेत्र में मजबूत खपत
  • वैश्विक स्तर पर तांबे की सीमित सप्लाई

इन सभी फैक्टर्स ने मिलकर कीमतों को मजबूत सपोर्ट दिया है।

एक्सपर्ट्स की राय
VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड रॉस मैक्सवेल के अनुसार, इलेक्ट्रिफिकेशन से जुड़ी मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि फिजिकल सप्लाई सीमित बनी हुई है। इसके अलावा कमजोर डॉलर और भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों ने भी निवेशकों के जोखिम लेने के भरोसे को बढ़ाया है।

सप्लाई-डिमांड का असंतुलन
ब्रोकरेज रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका के पास तांबे का सरप्लस स्टॉक मौजूद है, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में इसकी कमी बनी हुई है। यही कारण है कि ग्लोबल मार्केट में तांबे की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।

रिटेल निवेशकों के लिए क्या विकल्प?
भारत में रिटेल निवेशकों के लिए तांबे में निवेश के सुरक्षित और सीधे विकल्प फिलहाल सीमित हैं।

  • न तो देश में कॉपर ETF उपलब्ध हैं
  • न ही कॉपर म्यूचुअल फंड
  • फिजिकल तांबे में निवेश का भी कोई संगठित विकल्प नहीं

फिलहाल एकमात्र रास्ता MCX पर कॉपर फ्यूचर्स है, लेकिन इसमें जोखिम काफी ज्यादा है। एक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट 2.5 टन का होता है, जिससे निवेशक पर बड़ा एक्सपोजर बन जाता है। कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव की स्थिति में भारी नुकसान की आशंका भी बनी रहती है।

निष्कर्ष
तांबा भविष्य की जरूरतों से जुड़ी अहम धातु बनता जा रहा है और यही वजह है कि निवेशकों की दिलचस्पी इसमें तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को इसमें कदम रखने से पहले जोखिम और उपलब्ध विकल्पों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

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