महाराष्ट्र

“मुंबई मेयर को लेकर सियासी जद्दोजहद: होटल में 5 दिन बिताने के बाद एकनाथ शिंदे के 29 पार्षद हुए बाहर, अब BMC मेयर का फैसला दिल्ली में होगा।”

बीजेपी और शिंदे गुट में अभी भी सहमति नहीं, फैसला दिल्ली में संभव

मुंबई (शिखर दर्शन) // बीएमसी चुनाव में शानदार जीत के बावजूद मुंबई में मेयर पद को लेकर बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच खींचातानी जारी है। चुनाव परिणाम आने के छह दिन बाद भी दोनों दलों में इस पद पर सहमति नहीं बन सकी है।

बीएमसी चुनाव के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के 29 पार्षद बांद्रा के होटल ताज लैंड्स एंड में रुके थे, लेकिन पांच दिन के ठहराव के बाद अब वे बाहर आ गए हैं। अब मेयर पद के अंतिम निर्णय के लिए दिल्ली में बैठक होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें दोनों दलों के नेता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।

शिंदे गुट के नेता का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री कुर्सी पर समझौता करने के बावजूद बीएमसी चुनाव में कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 23 जनवरी से शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की जन्मशती वर्ष की शुरुआत हो रही है और शिवसैनिकों की इच्छा है कि इस अवसर पर बीएमसी का मेयर शिवसेना का हो।

शिंदे ने यह भी कहा कि महायुति गठबंधन में जिन नगर निगमों में शिवसेना और बीजेपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा है, वहां महायुति का ही मेयर बनेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि कोई भी फैसला जनता के जनादेश के खिलाफ नहीं होगा।

दिल्ली में होगा मेयर पद का रास्ता तय

बीजेपी और शिंदे गुट के नेता मंगलवार को दिल्ली पहुंचे। इस बैठक में सांस्कृतिक मंत्री आशीष शेलार, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम और शिंदे सेना के नेता राहुल शेवाले शामिल हैं।

बीएमसी के 29 नगर निगमों में मेयर पद के लिए 22 जनवरी को लॉटरी निकाली जाएगी। इसमें यह तय होगा कि पद ओपन कैटेगरी, अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। अधिसूचना जारी होने के सात दिन बाद मतदान कराया जाएगा। अगर अधिसूचना 23 जनवरी को जारी हुई, तो मेयर चुनाव 30 या 31 जनवरी को संभव है।

चुनावी नतीजे

बीएमसी में कुल 227 सीटों में से बीजेपी को 89 और शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं। दोनों पार्टी मिलकर बहुमत के आंकड़े तक पहुंच रही हैं। इससे पहले महायुति की ओर से मेयर के नाम पर सहमति बनने के बाद भी शिवसेना ने अपने पार्षदों को होटल में भेजा था। इस कदम के पीछे पार्टी ने पार्षदों को ओरिएंटेशन वर्कशॉप में शामिल करने का औपचारिक तर्क दिया था।

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