SIR में गड़बड़ी का आरोप: रायपुर तहसील कार्यालय में कांग्रेस का प्रदर्शन, कार्यकर्ता हिरासत में, बाद में निशर्त रिहा , PCC चीफ दीपक बैज ने सरकार और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // राजधानी रायपुर के तहसील कार्यालय में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देर रात जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने बीजेपी के इशारे पर मतदाताओं के नाम काटे जाने का आरोप लगाया और तहसील कार्यालय में नारेबाजी करते हुए दावा-आपत्ति फॉर्म दिखाने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया। सूचना मिलते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारियों के साथ सेंट्रल जेल परिसर पहुंचे और धरने पर बैठकर विरोध दर्ज कराया।
नियमों के विपरीत फॉर्म स्वीकार करने का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि रायपुर तहसील कार्यालय में SIR के तहत 400 दावा-आपत्ति फॉर्म नियमों के विपरीत स्वीकार किए गए हैं, जबकि नियमानुसार एक सीमित संख्या में ही फॉर्म लेने का प्रावधान है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी के दबाव में न केवल अधिक फॉर्म स्वीकार किए गए, बल्कि चुनिंदा मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जा रहे हैं। जब इन फॉर्मों को दिखाने की मांग की गई तो तहसीलदार ने संबंधित बाबू के उपलब्ध न होने की बात कही।
पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी
फॉर्म न दिखाए जाने से नाराज कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय के भीतर और केबिन में बैठकर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंची पुलिस और कांग्रेसियों के बीच झूमाझटकी की स्थिति भी बनी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सेंट्रल जेल पहुंचाया। हालात को देखते हुए मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निशर्त रिहा करने के निर्देश दिए।
पीसीसी चीफ का आरोप: शांति भंग के झूठे मामले
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि SIR में गड़बड़ी को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को शांति भंग के झूठे आरोप में जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित लोगों द्वारा तहसील कार्यालय में बल्क में फॉर्म जमा किए जा रहे हैं और SIR के नाम पर देशभर में मतदाताओं के नाम काटने का खेल चल रहा है।
दीपक बैज ने सवाल उठाया कि जब फॉर्म दिखाने की मांग की जाती है तो अधिकारी पीछे क्यों हट जाते हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल उठाने का पूरा अधिकार है। आखिर सरकार और चुनाव आयोग क्या चाहते हैं—यह सवाल आज पूरे प्रदेश में उठ रहा है।



