ईरान में अली खामेनेई के विरोध में बगावत करने वाले इरफान सुल्तानी को सार्वजनिक रूप से फांसी दिए जाने का खतरा, मामला आखिरी निर्णय की कगार पर पहुंचा

ईरान / तेहरान / ( एजेंसी ) // ईरान में 18वें दिन भी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। देशभर में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 10,000 से ज्यादा लोग हिरासत में हैं। इस बीच 26 वर्षीय युवा प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को सरेराह फांसी दिए जाने का खतरा है।
इरफान सुल्तानी मध्य ईरान के फार्दिस में कपड़ों की दुकान चलाते हैं। उन्हें 8 जनवरी को शासन विरोधी प्रदर्शनों में भाग लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हेंगॉव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स की सदस्य अरिना मोरादी ने बताया कि सुल्तानी का परिवार इस खबर से गहरे सदमे और निराशा में है। परिवार ने स्पष्ट किया कि उनका बेटा कभी कोई राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं था और सिर्फ युवा पीढ़ी का हिस्सा था जो ईरान की मौजूदा स्थिति के खिलाफ विरोध कर रहा था।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सुल्तानी को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्हें कानूनी सलाह तक पहुँच से रोका गया और उनकी बहन, जो कि एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं, कानूनी प्रक्रिया अपनाने में असमर्थ रही हैं।
ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ के अनुसार, 11 जनवरी को हुई अदालती सुनवाई में इरफान पर ‘मोहारेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ का आरोप लगाया गया और मौत की सजा सुनाई गई। परिवार को फांसी से पहले केवल 10 मिनट की अंतिम मुलाकात की अनुमति दी जाएगी।
ईरान में इस तरह के दमनात्मक कदमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को फांसी दी जाती है, तो अमेरिका इसका कड़ा जवाब देगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने का संदेश भी दिया है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर आरोप लगाया है कि वे ईरान में लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इरफान सुल्तानी को सरेराह फांसी दी जाती है, तो यह प्रदर्शन और तेज कर सकता है और ईरान के खामेनेई शासन के लिए बड़े संकट का संकेत हो सकता है।




