छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग और शराब घोटाले में हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा समेत 4 आरोपियों को जमानत दी

बिलासपुर (शिखर दर्शन) // छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग और शराब घोटाले के मामलों में हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने कस्टम मिलिंग घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर और रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। इसके अलावा शराब घोटाले में आरोपी मुकेश मनचंदा और अतुल सिंह को भी जमानत मिल गई है।
कस्टम मिलिंग घोटाला: 140 करोड़ की अवैध वसूली
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग घोटाले की राशि 140 करोड़ रुपए से अधिक है। आरोप है कि इस घोटाले में अफसरों से लेकर राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तक शामिल थे। अलग-अलग राइस मिल्स के माध्यम से नागरिक आपूर्ति निगम और FCI में कस्टम मिलिंग के तहत जमा किए गए चावल में अवैध वसूली की गई।
ईओडब्ल्यू ने इस मामले में अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को आरोपी बनाया और कोर्ट में चालान पेश किया था, जिसके बाद दोनों को जेल भेजा गया। अब हाईकोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी है।
20 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अवैध वसूली
ईओडब्ल्यू के अनुसार फरवरी 2025 में रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ पहला चालान पेश किया गया। आरोप है कि अनिल टुटेजा और राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच आपराधिक षड्यंत्र होता रहा। राइस मिलों से अवैध वसूली में कम से कम 20 करोड़ रुपए की राशि प्राप्त की गई। अवैध वसूली के लिए मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता था, जिससे राइस मिलर दबाव में आकर 20 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अवैध रकम देते थे।
अनवर ढेबर का प्रभाव और शराब घोटाले से संबंध
अनवर ढेबर साल 2022 से 2023 तक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली रहे। आयकर विभाग की छापेमारी में प्राप्त डिजिटल साक्ष्य से यह प्रमाण मिले कि उन्होंने न केवल शराब घोटाले में, बल्कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय PWD और वन विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी प्रभाव रखा। कस्टम मिलिंग घोटाले में अनवर ढेबर ने अनिल टुटेजा के लिए राइस मिलों से वसूली गई अवैध राशि का उपयोग निवेश, खर्च और उपभोग में किया।
बचाव पक्ष के वकील हर्षवर्धन परघनिया ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरोपियों को राहत मिली है।



