20 से अधिक गांवों में बिजली न पहुंचने के विरोध में नेशनल हाइवे जाम , जिससे सड़क के दोनों ओर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं।

राजा पड़ाव क्षेत्र में आदिवासियों का बिजली के लिए नेशनल हाइवे 130 सी जाम, ग्रामीणों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने का किया ऐलान
गरियाबंद ( शिखर दर्शन ) // मैनपुर के आदिवासी बाहुल्य राजा पड़ाव क्षेत्र में आज फिर नेशनल हाइवे 130 सी जाम हो गया। इलाके की 8 पंचायतों के 30 गांव से पहुंचे 2,000 से अधिक महिला-पुरुषों ने सड़क को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। प्रदर्शनकारी ग्रामीण पिछले कई वर्षों से विद्युत सुविधा से वंचित 20 से अधिक गांवों में बिजली पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। हाईवे जाम होने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
ग्रामीणों ने बताया कि उदंती सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में आने वाले इन गांवों में अंडर ग्राउंड बिजली लगाने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन बजट और प्रशासनिक देरी के कारण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।
मैनपुर ब्लॉक के राजापड़ाव क्षेत्र की आदिवासी पंचायतों में यह सालभर में चौथी बार है जब लोग बिजली के लिए सड़क पर उतरे हैं। अम्बेडकरवादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम ने बताया कि यह क्षेत्र भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्र है। यहां निवासरत आदिवासी समुदायों को संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची और पेसा अधिनियम 1996 के तहत विशेष अधिकार एवं संरक्षण प्राप्त है।
ग्रामीणों ने कहा कि राजापड़ाव क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों में से केवल अड़गड़ी, शोभा और गोना पंचायतों में आंशिक विद्युतीकरण हुआ है, जबकि भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव के लोग आज भी 78 साल बाद अंधकार में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। इससे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (सम्मानजनक जीवन का अधिकार), अनुच्छेद 21-क (शिक्षा का अधिकार) और अनुच्छेद 38 व 39 में निहित सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होना केवल सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की सिंचाई और सूचना तक पहुंच के अधिकार से जुड़ा हुआ है। पूर्व में प्रशासन ने इन पंचायतों के लिए विद्युतीकरण की स्वीकृति दी थी और काम भी प्रारंभ हुआ था, लेकिन 2023 के बाद बिना किसी कानूनी या प्रशासनिक आदेश के कार्य रोक दिया गया।
आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी समस्याओं को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे से अवगत कराएंगे।



