सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई: न्यायालय बोला- जो डरते हैं कुत्तों से, वही उनके काटने का शिकार, बहस का केंद्र बना कुत्तों का व्यवहार

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर चर्चा जारी, जज ने बताया ‘कुत्ता डर पहचान कर हमला करता है‘
नई दिल्ली (शिखर दर्शन) // आवारा कुत्तों से जुड़े विवादित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। ढाई घंटे तक चली बहस में कुत्तों के व्यवहार और शहरों में उनके प्रबंधन पर जोरदार चर्चा हुई।
सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कहा, “कुत्ता हमेशा उन लोगों को पहचान लेता है, जो उससे डरते हैं। जब वह ऐसा महसूस करता है, तो हमला कर देता है। यह मैं अपने निजी अनुभव से कह रहा हूँ।” यह बात सुनकर कोर्ट में मौजूद डॉग लवर्स सहमति में सिर हिलाने लगे, जिस पर जज ने उनसे कहा कि सिर मत हिलाइए। जज ने यह भी चेतावनी दी कि पालतू कुत्ते भी ऐसे ही व्यवहार कर सकते हैं।
मामले में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने डॉग लवर्स और कड़े अनुपालन की मांग करने वालों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें तय शेल्टर में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि राज्यों द्वारा दिए गए आंकड़ों में नगर पालिकाओं के शेल्टर्स का जिक्र नहीं है। देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर्स हैं, जिनमें से हर एक में केवल 100 कुत्ते रखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।

एनिमल वेलफेयर की तरफ से दलील पेश करने वाले एडवोकेट सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर भेजने पर आपत्ति जताई और कहा कि इससे चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा, “तो क्या बिल्लियां ले आएं?”
जस्टिस संदीप मेहता ने सुनवाई के बाद कहा कि शुक्रवार को सभी वकील 29 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित आर्टिकल “On the roof of the world, feral dogs hunt down Ladakh’s rare species” पढ़कर आएं। इस आर्टिकल में बताया गया है कि लद्दाख में जंगली कुत्तों की संख्या बढ़ने से संवेदनशील इकोसिस्टम और दुर्लभ जानवरों को खतरा है।
सुनवाई कल भी जारी रहेगी।




