सरकारी स्कूल में प्रार्थना के दौरान अफरा-तफरी, एक-एक कर बेहोश हुए बच्चे, सभी को अस्पताल में कराया गया भर्ती

जहरीले फल खाने से 16 बच्चे बीमार, चार की हालत नाजुक, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
खैरागढ़ ( शिखर दर्शन ) // करमतरा स्थित शासकीय प्राथमिक स्कूल में मंगलवार सुबह प्रार्थना सभा के दौरान अचानक 16–17 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, जिससे स्कूल का शांत माहौल चीख-पुकार और दहशत में बदल गया। बच्चों के अचानक चक्कर खाकर गिरने की घटना ने शिक्षक और स्टाफ को भी हैरान कर दिया।
जानकारी के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले कुछ बच्चों ने परिसर और आसपास उगे रतनजोत के जहरीले पौधे का फल खा लिया था। उन्हें इसके खतरनाक होने का अंदाज़ा नहीं था। प्रार्थना सभा के दौरान ज़हर का असर सामने आया और बच्चे एक-एक कर जमीन पर गिरने लगे।
चिकित्सा स्थिति और अस्पताल में हड़कंप
हालात बिगड़ते देख सभी 16–17 प्रभावित बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जालबांधा ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार चार बच्चों की स्थिति गंभीर है। एक बच्चे को बेहतर इलाज के लिए खैरागढ़ रेफर किया गया है, जबकि अन्य बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
घटना की खबर फैलते ही करमतरा गांव में हड़कंप मच गया। अभिभावक और ग्रामीण बच्चों की चिंता में अस्पताल पहुंच गए। कई माता-पिता ने सवाल उठाया कि स्कूल परिसर में जहरीले पौधे कैसे उग आए और समय-समय पर उनकी निगरानी क्यों नहीं की गई।
जिला शिक्षा अधिकारी की अनभिज्ञता और प्रशासनिक सवाल
इस मामले में जिले के शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी भी घटना से अनजान पाए गए। उन्होंने मीडिया से जानकारी मिलने के बाद कहा, “मुझे इस घटना की जानकारी नहीं थी। आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी की इस प्रतिक्रिया ने स्कूल निरीक्षण और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय मांगें और सुरक्षा पर चिंता
स्थानीय लोग और अभिभावक स्कूल परिसर और आसपास के सभी जहरीले पौधों को हटाने, लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नियमित निगरानी और सफाई होती तो इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।
करमतरा की यह घटना बच्चों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी है और सरकारी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़ा करती है।




