5 जनवरी महाकाल भस्म आरती: रजत चंद्र, रुद्राक्ष माला, मुकुट और पुष्पों से सजे भगवान महाकालेश्वर, यहां करें दिव्य दर्शन

उज्जैन ( शिखर दर्शन ) //
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि सोमवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर जय जय श्री महाकाल, हर हर महादेव, हर हर शंभू और ॐ नमः शिवाय के उद्घोष से गूंज उठा। परंपरागत विधि-विधान के साथ भस्म आरती विशेष श्रृंगार में संपन्न हुई।
मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों द्वारा गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा महाकाल के मस्तक पर चंद्र अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार किया गया।

भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के मध्य भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला एवं पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित पुष्पों और आभूषणों से बाबा महाकाल का अलंकरण अत्यंत मनोहारी रहा।

सुबह आयोजित भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कानों में अपनी मनोकामनाएं कहीं। इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में बाबा महाकाल के जयकारे गूंजते रहे और भक्तिभाव से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।



