अयोध्या श्री राम मंदिर : गर्भ गृह में स्थापित होने वाली रामलला की मूर्ति का फाइनल होना अभी बाकी , काशी के आचार्य लेंगे अंतिम निर्णय मंदिर ट्रस्ट…!

अयोध्या/( शिखर दर्शन)// अयोध्या के श्री राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश दुनिया के राम भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है । प्राण प्रतिष्ठा के लिए अब 18 दिन बाकी हैं लेकिन मंदिर प्रबंधन अभी तक मूर्ति का चयन नहीं कर पाया है । इससे पहले सोमवार को भाजपा नेता केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस यदियूरेप्पा के बयान के बाद मूर्ति के चयन को लेकर चर्चा शुरू हुई थी ।

दरअसल भाजपा नेता यदियूरेप्पा ने कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक पर पहले ट्विटर पर पोस्ट कर बधाई दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके द्वारा बनाई गई प्रतिमा को अयोध्या के नए राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के लिए चुन लिया गया है । इसके बाद देशभर में सोशल मीडिया से लेकर में स्ट्रीम मीडिया तक या खबर छाई रही लेकिन अब मंदिर ट्रस्ट की ओर से इसे लेकर स्थिति को स्पष्ट किया गया है ।
मूर्ति चयन पर ट्रस्ट का निर्णय उचित समय पर किया जाएगा सार्वजनिक
मंदिर का निर्माण कर रहे राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने फैसले की घोषणा नहीं की थी । वहीं अब राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी कोई निर्णय लेने की बात नहीं कही है । मंदिर ट्रस्ट ने यह स्पष्ट किया है कि तीन मूर्तिकारों के बीच मूर्ति का चयन किया गया था ।लेकिन अंतिम चयन के लिए अभी भी इंतजार किया जा रहा है
ट्रस्ट के पदाधिकारी ने कहा की मूर्ति के बारे में निर्णय काशी के आचार्य गणेश्वर शास्त्री शंकराचार्य विजेंद्र सरस्वती और अन्य संतों के परामर्श से लिया जाएगा । ट्रस्ट के कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने बताया ट्रस्ट का जो भी निर्णय होगा उसे उचित समय पर सार्वजनिक किया जाएगा । चयनित प्रतिमा को गर्भ गृह में स्थापित किया जाएगा ट्रस्ट के अधिकारियों के मुताबिक गर्भ गृह के लिए मूर्ति का चयन करते समय उसकी चमक लंबे समय तक टिके रहने जैसे पहलुओं पर एक तकनीकी रिपोर्ट भी ध्यान में रखा जाएगा ।मूर्ति के चयन के बाद 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में एक समारोह में उसकी प्राण प्रतिष्ठा की जावेगी ।
पुरानी प्रतिमा भी को उत्सवों के लिए परिसर में रखा जाएगा

जाहिर है वर्ष 1949 से श्रद्धालु रामलला की प्रतिमा वाले अस्थाई मंदिर में पूजा अर्चना करते रहे हैं । इस मंदिर को भी मंदिर निर्माण के लिए स्थानांतरित कर दिया गया था । जो 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शुरू हुआ शीर्ष अदालत ने अयोध्या में मंदिर मस्जिद विवाद का निपटारा किया था । अब राम मंदिर ट्रस्ट अधिकारियों का कहना है की पुरानी मूर्ति को उत्सव के अवसरों पर परिसर में रखा जाएगा ।
येदीयूरेप्पा ने कर्नाटक के मूर्तिकार को “चयन” के लिए दी थी बधाई
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस यदियूरेप्पा ने सोमवार को सोशल मीडिया एप्स पर मूर्ति के चयन को लेकर पोस्ट किया था उन्होंने लिखा था ,”मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई भगवान राम की मूर्ति को अयोध्या के भगवान श्री राम मंदिर में स्थापना के लिए चुना गया है । इससे राज्य के सभी राम भक्तों का गौरव और खुशी दुगनी हो गई है” शिल्पी योगीराज अरुण को हार्दिक बधाई यदियूरेप्पा के बेटे और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बी ए विजेंद्र ने भी योगीराज की सराहना की थी ।
मूर्ति स्वीकार किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली : योगीराज
यदियूरेप्पा से मूर्ति चयन की बधाई मिलने के बाद योगीराज ने उनका आभार जताया था । हालांकि उन्होंने बाद में एक इंटरव्यू में बताया कि उन्हें अभी तक उनकी मूर्ति स्वीकार किए जाने के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है । उन्होंने कहा मुझे खुशी है कि मैं देश के उन मूर्तिकारों में शामिल था, जिन्हें रामलला की मूर्ति तरासने के लिए चुना गया था ।
तीन मूर्तिकारों ने बनाई मूर्तियां
ज्ञात हो की तीन मूर्तिकारों ने अलग-अलग पत्थरों पर अलग-अलग काम करके भगवान राम की मूर्तियां बनाई है उनमें से दो के लिए पत्थर कर्नाटक से आया था । और तीसरी मूर्ति राजस्थान से लाई गई चट्टान से बनाई जा रही थी , मूर्तियों की नक्काशी जयपुर के मूर्तिकार सत्यनारायण पांडे और कर्नाटक के गणेश भट्ट और अरुण योगीराज ने की थी। ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार गर्भगृह के लिए मूर्ति का चयन करते समय उसकी चमक लंबे समय तक टिके रहने जैसे पहलुओं पर तकनीकी रिपोर्ट के आधार को भी ध्यान में रखा जाएगा ।



