28 नवंबर महाकाल भस्म आरती : कण-कण में महादेव की अनुभूति, बाबा महाकालेश्वर का ‘राजा स्वरूप’ में दिव्य श्रृंगार
उज्जैन में 28 नवंबर की भस्म आरती आज विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जब बाबा महाकालेश्वर को अलौकिक ‘राजा स्वरूप’ में सजाया गया। प्रातः 4 बजे से शुरू हुई इस पारंपरिक आरती में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जहां मंदिर परिसर में “हर हर महादेव” के जयकारों से सम्पूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा।
भस्म आरती के दौरान महाकाल मंदिर के गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार राजसी रूप में किया गया। स्वर्ण अलंकरण, रजत आभूषणों और विशिष्ट वस्त्रों से सजे बाबा के दर्शन करने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। बाबा का मुखारविंद जब तिलक, चंदन, फूल-माला और रुद्राक्ष से अलंकृत होकर बाहर आया, तो भक्त भाव-विभोर होकर नतमस्तक हो गए।
आज की भस्म आरती में भी पारंपरिक ढंग से पवित्र चिता-भस्म का लेपन किया गया। पुजारियों ने शास्त्रीय विधि-विधान के साथ जलाभिषेक, पंचामृत स्नान, चंदन-धूप और महाआरती द्वारा बाबा का पूजन किया। हर दिशा में गूंजते नगाड़ों, शंखध्वनि और डमरू की ताल ने इस आध्यात्मिक माहौल को और भी दिव्य बना दिया।
श्रद्धालुओं का मानना है कि भस्म आरती के दर्शन मात्र से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और महाकाल की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जिन भक्तों को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल पाया, उन्होंने नागचंदेश्वर गेट और मंदिर परिसर के बाहर लगी बड़ी स्क्रीन पर लाइव दर्शन किए।
आज के दिन महाकाल की भक्ति में डूबा उज्जैन सचमुच इस बात का साक्षी बना कि यहां “कण-कण में महादेव” बसते हैं।
