27 नवंबर भस्म आरती: मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिनेत्र से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार, यहां देखें दर्शन

उज्जैन (शिखर दर्शन) // विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मार्गशीर्ष माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर गुरुवार तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। जैसे ही गर्भगृह के द्वार खुले, पूरा मंदिर परिसर जय जय श्री महाकाल, हर हर महादेव, हर हर शंभू और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गूंज उठा। अलसुबह होने वाली भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ अत्यंत मनोहारी स्वरूप में संपन्न हुई।
मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया और भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक एवं विशेष पूजन सम्पन्न हुआ।
भस्म अर्पण से पूर्व प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरिओम’ का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान कर कपूर आरती उतारी गई। इसके उपरांत ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाओं से सजाया गया। दिव्य अलंकरण में भगवान का विग्रह अद्भुत आभा बिखेर रहा था।
अल सुबह आयोजित इस पवित्र भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भक्तों ने नंदी महाराज का दर्शन किया और परंपरा अनुसार उनके कान में अपनी मनोकामनाएं फुसफुसाकर पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान भक्तों के लगातार गूंजते जयकारों से पूरा महाकाल मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।



