SIR प्रक्रिया पर बवाल: मतदाता सूची से हजारों नाम गायब, पूर्व विधायक और पूर्व मेयर ने चुनाव आयोग की तैयारी पर उठाए सवाल

रायपुर ( शिखर दर्शन ) // विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया जैसे-जैसे तेज़ी पकड़ रही है, वैसे-वैसे मतदाता सूची की खामियां खुलकर सामने आ रही हैं। सूची में बड़ी संख्या में नाम गायब होने से नागरिकों में नाराज़गी है। इसी समस्या को लेकर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और पूर्व रायपुर मेयर एजाज़ ढेबर ने निर्वाचन अधिकारियों से मुलाकात की और चुनाव आयोग पर बिना तैयारी SIR लागू करने का आरोप लगाया।

80 लोगों के नाम सूची से गायब—पूर्व विधायक ने उठाई बड़ी चिंता
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बताया कि रामसागर पारा स्थित रामजी हलवाई गली के करीब 80 नागरिकों के नाम 2003 की मतदाता सूची से गायब हैं। उन्होंने निर्वाचन अधिकारी से मिलकर इन मामलों की विस्तृत जानकारी दी।
उपाध्याय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि “ये वही लोग हैं जिन्होंने 1998 में मुझे वोट किया था, आज अचानक उनका नाम सूची में नहीं है। आयोग की तैयारी अधूरी है, जल्दबाजी में SIR लागू किया गया है जिससे जनता परेशान हो रही है।”

उन्होंने कहा कि बीएलओ को भी सही जानकारी नहीं दी गई है और जिनके नाम हटे हैं उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा।
“लोगों से कहा जा रहा है कि बस फॉर्म भर दीजिए, जबकि 2003 की सूची की कॉपी तक उपलब्ध नहीं है। आयोग और सरकार को पहले प्रशिक्षण और व्यवस्था दुरुस्त कर SIR लागू करना चाहिए था,” उपाध्याय ने जोड़ा।
एजाज़ ढेबर का आरोप—‘मतदान के संवैधानिक अधिकार पर हमला’
पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर ने भी मतदाता सूची में बड़ी गड़बड़ी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। ढेबर ने इसे नागरिकों के मतदान अधिकार पर सीधा हमला बताया।
ज्ञापन में बताया गया कि—
- 2003 से लगातार मतदान कर रहे हजारों नागरिकों के नाम बिना सूचना हटाए गए।
- बड़ी संख्या में लोगों ने SIR फॉर्म ऑनलाइन और ऑफलाइन भरे, लेकिन किसी को पावती/रसीद नहीं मिली, जिससे आवेदन की स्थिति ट्रैक करना संभव नहीं है।
- हटाए गए नामों के लिए अलग पोर्टल या मॉड्यूल भी उपलब्ध नहीं, जिससे लोगों में भ्रम और निराशा बढ़ रही है।
ढेबर ने कहा कि “लोग समझ ही नहीं पा रहे कि अपना नाम वापस कैसे जोड़ें, शिकायत कहाँ करें। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।”
नागरिकों में बढ़ी परेशानी, पारदर्शिता पर उठे सवाल
SIR के दौरान सामने आई इस अव्यवस्था को लेकर रायपुर में आम नागरिकों की चिंता बढ़ गई है। बड़ी संख्या में लोग मतदाता सूची में अपना नाम खोजने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया स्पष्ट न होने से भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

पूर्व जनप्रतिनिधियों का कहना है कि चुनाव आयोग को तुरंत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर लोगों की मदद करनी चाहिए, ताकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में सुधार हो सके।



