25 नवंबर भस्म आरती : कण-कण में महादेव… बाबा महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, भक्त हुए भाव-विभोर

उज्जैन (शिखर दर्शन) // मार्गशीर्ष माह में सोमवार 25 नवंबर की अलसुबह श्री महाकालेश्वर मंदिर में संपन्न हुई भस्म आरती पूर्णतः दिव्य और अद्भुत अध्यात्मिक आभा से ओतप्रोत रही। तड़के 4 बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खोले गए, पूरा परिसर जय जय श्री महाकाल… हर हर महादेव… हर हर शंभू… ॐ नमः शिवाय के नाद से गूंज उठा। हर तरफ शिवत्व का अनुभव होता रहा, मानो कण-कण में स्वयं महादेव विराजमान हों।
पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान हुआ।
कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इस पवित्र अनुष्ठान के पश्चात भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत निर्मित मुण्डमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया। दिव्य श्रृंगार के दर्शन से मंदिर परिसर की आभा अतुलनीय हो उठी।
भस्म आरती में शामिल सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शनों से स्वयं को धन्य महसूस किया। नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर भक्तों ने आशीर्वाद लिया। पूरे मंदिर में भक्तिभाव, उत्साह और शिव की महिमा का अनूठा संगम अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।



