“सुरक्षा पर बड़ा सवालः 27 साल से बिना पासपोर्ट का विदेशी नागरिक शहर में छिपकर रह रहा था, पुलिस और मकान मालिक की लापरवाही उजागर”

इंदौर (शिखर दर्शन) // इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। शिव शक्ति नगर के मकान मालिक शेखर कुशवाह ने वर्षों पहले किराए पर रखे गए व्यक्ति रिचर्ड एस. मायका केनिया का रहने वाला निकला, जो पिछले 27 साल से बिना वैध वीजा और पासपोर्ट के शहर में रह रहा था।
जांच में सामने आया कि रिचर्ड का वीजा 30 जून 1998 में समाप्त हो चुका था, बावजूद इसके उसे पुलिस और खुफिया विभाग की नाकामी के चलते शहर में खुलेआम रहने दिया गया। साल 2018 में भी एक PSI ने उसे पकड़कर पूछताछ की थी, तब यह तथ्य सामने आया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
रिचर्ड के फेसबुक प्रोफाइल पर हिंसा भड़काने वाले वीडियो और उग्र पोस्ट पाए गए हैं। सोशल मीडिया पर हजारों विदेशी फॉलोअर्स होने के बावजूद उसके मित्र सूची में इंदौर के कोई नागरिक नहीं थे, जो यह दर्शाता है कि वह गुपचुप तरीके से लंबे समय से शहर में सक्रिय था।
विशेषज्ञों के अनुसार, अब ऐसे मामलों में इमिग्रेशन फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पांच से सात साल की कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। FRRO के पास अवैध ठहराव की जांच, निरीक्षण और डिपोर्टेशन की संवैधानिक शक्तियां हैं, लेकिन उनका सही इस्तेमाल केवल तब संभव है जब स्थानीय पुलिस समय पर जानकारी दे और सत्यापन प्रणाली प्रभावी हो।
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इंदौर में और भी विदेशी बिना दस्तावेज़ों के रह रहे हैं और क्या उन्होंने आधार, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज बना लिए होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ किरायेदार का नाम दर्ज करना पर्याप्त नहीं है। दस्तावेज़ों का कड़ा सत्यापन, क्षेत्रवार निगरानी और मकान मालिकों पर स्पष्ट कार्रवाई अब अनिवार्य हो गई है। रिचर्ड का मामला केवल एक विदेशी का नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा और व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का आईना बन गया है।



